इंसान और मोबाइल
आज ज़माना भी गज़ब ढा रहा हैमोबाइल तक ख़ुद को सीमित कर रहा हैघर में चार लोग, बैठे चार किनारेएक दूसरे को देखे भी ना..और चैट पर पूछ रहे इक दूजे का हाल,वक्त नहीं है […]
आज ज़माना भी गज़ब ढा रहा हैमोबाइल तक ख़ुद को सीमित कर रहा हैघर में चार लोग, बैठे चार किनारेएक दूसरे को देखे भी ना..और चैट पर पूछ रहे इक दूजे का हाल,वक्त नहीं है […]