नूतन वर्ष मे प्रबुद्धजन की चिन्ता और उनके संकल्प : समाज की सच्ची तस्वीर पेश करती हुई


प्रयागराज। अभिनव वर्ष की पूर्व-संध्या मे ‘सर्जनपीठ’, प्रयागराज की ओर से एक राष्ट्रीय आन्तर्जालिक बौद्धिक परिसंवाद-आयोजन किया गया, जिसमे प्रबुद्धजन ने अपनी-अपनी चिन्ता के साथ अपना-अपना विचार और संकल्प सार्वजनिक किया।

आशा राठौर (सहायक प्राध्यापक– हिन्दी, श्री राघवेन्द्र सिंह हजारी शासकीय महाविद्यालय, हटा, दमोह) ने बताया– सच कहूँ तो स्वयं कोई योजना बनाकर नहीँ चल पाती। जब भी कोशिश करती हूॅं, विफल सिद्ध हो जाती हूँ। इसका कारण कुछ भी हो सकता है– वा तो मुझे योजनाएँ बनाने नहीँ आतीँ वा फिर उन पर चलने की मेरी असमर्थता दिखती है। हाँ, प्रत्येक नूतन वर्ष मे कुछ विचार तो होते ही हैँ, जिनके बारे मे सोचती हूॅं और पूर्ण करने का प्रयास करती हूॅं। ज़िन्दगी जितना देती है; जो देती है और जब देती है, बस उसे स्वीकार करती जाती हूॅं।

प्रमोद कुमार द्विवेदी (सहायक निदेशक राजभाषा प्रभारी विधि प्रकोष्ठ मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, इलाहाबाद) ने कहा– मैने नव वर्ष मे दो संकल्प किये हैँ :– पहला, पर्यावरण के प्रति जनजागरण- अभियान को प्रारम्भ करना और दूसरा, युवा और विद्यार्थियोँ के व्यक्तित्व-संवर्द्धन और चरित्र-गठन करने के लिए सकारात्मक प्रयत्न करना। इनके अतिरिक्त कोई ज़रूरतमन्द व्यक्ति मुझसे क़ानूनी सलाह के लिए 8004945244 नम्बर पर सम्पर्क कर सकता है।

आयोजक, व्याकरणवेत्ता एवं भाषाविज्ञानी आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय ने कहा– देश मे जिस तरह से सारे संवैधानिक तन्त्र अपने अर्थ, अभिप्राय और उपयोगिता खोते दिख रहे हैँ, वह जनसामान्य के लिए घोर चिन्ता का विषय बन चुका है। साम्प्रदायिक विद्वेष अपने चरम पर पहुँच चुका है; पारस्परिक सौहार्द अपना औचित्य खोता जा रहा है। अब इन सबको विचार और व्यवहार-स्तर पर स्वस्थ रूप देने पर बल होगा। अभिनव वर्ष मे क्षरण होते जीवनमूल्य और युगबोध को सकारात्मक परिदृश्य के साथ जोड़ने का अपना प्रयास होगा।

डॉ० राघवेन्द्रकुमार त्रिपाठी ‘राघव’ (आयुर्वेदाचार्य-लेखक, बालामऊ, हरदोई) ने कहा– हमसब प्रतिक्षण विचारशील हैँ और सदैव कुछ अच्छा और समाजोपयोगी करने का प्रयास करते हैँ– कभी कुछ अच्छा होता और कभी-कभी वाणी के असंयमित हो जाने से बुरा भी। बीते वर्ष मे जो कुछ भी ग़लतियाँ हुईँ, अभिनव वर्ष मे उनकी पुनरावृत्ति न हो; ऐसा प्रयास रहेगा। जीवन की सार्थकता के लिए विचारशीलता एक महत्त्वपूर्ण गुण है। सद्ग्रन्थोँ के अध्ययन और उदात्त विचारोँ को आत्मसात करना, हमारी अंतर्निहित शुभ प्रवृत्ति को जाग्रत् करता है और हमे सत्पथ पर चलने की प्रेरणा देता है। इस वर्ष समाज को हम क्या और कितना दे सकते हैँ, यही उद्देश्य रहेगा और जो हमारे पास है, यदि उससे किसी को लाभ मिल सकता है तो उसे प्रतिपल देने का प्रयास रहेगा।

बृजेन्द्रनाथ त्रिपाठी (सहायक अध्यापक– बेसिक शिक्षा-विभाग, गोरखपुर ने बताया– हमारी संस्कृति ही हम भारतवासियोँ का प्राण है, जिसकी रक्षा की निरन्तर प्रवृत्ति ही हमारे शिक्षित होने का प्रमाण है। पश्चिमी सभ्यता का अन्धानुकरण अपने ज्ञान, गरिमा और संस्कार का मानमर्दन है । हमे नव वर्ष के प्रण-पत्र पर निर्भय होकर, मन, वचन और कर्म मे दृढ़ होकर, भारतीयता के रक्षा-हेतु अमिट हस्ताक्षर करना है। हमे नीर-क्षीर विवेक से देश के पाखण्डियोँ और मानवता के अतिक्रमणकारियोँ को पहचान कर, दृढ़तापूर्व विरोध करना होगा। हमे पूर्ण निष्ठा से राष्ट्रहित मे आगे आकर अपनी भूमिका निभानी होगी, अन्यथा आने वाली पीढ़ियाँ हमे क्षमा नहीँ करेँगी।

आदित्य त्रिपाठी (लेखक एवं सहायक अध्यापक, प्रतापपुर, कोथावाँ, हरदोई) ने कहा– घर-परिवार-समाज, जिससे सबसे ज़्यादा प्रभावित होता है, वह हमारा विचार है। वैचारिक पूँजी के सहारे हम सबल समाज के विकास मे योगदान कर सकते हैँ। यदि विचार उच्च और निर्मल होँगे तो हमारा जीवन भी सकारात्मक और प्रेरणादायक बनेगा। एक अध्यापक होने के नाते वैचारिक शुद्धता हमारा कर्त्तव्य भी है। हम सब जानते हैं कि जीवन की सफलता और सार्थकता के लिए हमे अपने विचार को दिव्यता और शुचिता से सम्पन्न करने का सतत प्रयास करना चाहिए। ऐसे मे, हमारा यह संकल्प है कि हम इस वर्ष अपने विचारों को कलुष-मुक्त रखेँगे, साथ ही और अपने सहकर्मियोँ और विद्यार्थियोँ को भी प्रेरित करेँगे। नूतन वर्ष मे एक और संकल्प यह है कि सामाजिक विद्वेष फैलाने वालोँ से सर्वथा दूर रहेँगे और ऊँच-नीच की भावना से स्वयं को भी मुक्त रखेँगे।

चकोरी शुक्ल (शोधच्छात्रा– वनस्पतिविज्ञान, रायबरेली) ने बताया– भारत की एक जागरूक नागरिक होने के नाते मैने भी कुछ संकल्प किये हैँ, जिनमे से अहम है, बिजली- संरक्षण, जो मात्र एक स्विच दबाकर हम सभी कर सकते हैँ। बिजली एक ग़ैर-नवीकरणीय संसाधन है, इसीलिए इसका उपयोग अत्यधिक ज़िम्मादारी से करना होगा। देश के कार्बन- उत्सर्जन पर अधिक दबाव न पड़े, इस सोच के साथ मैने अपने घर पर सौर पैनल्स भी लगवाये हैँ, जो सूर्य-प्रकाश-द्वारा उत्पन्न सौर ऊर्जा का उपयोग करते हुए, बिजली उत्पादन करते हैँ, साथ ही वैश्विक तपन को नियन्त्रित करने मे मददगार साबित होते हैँ।

मंजुरानी देवी (भोजपुरी-गायिका, बाँसडीह, बलिया) ने कहा– हम कलाकारोँ को उचित स्थान नहीँ मिलता। मै एम० ए० पास हूँ; परन्तु उचित सुविधा-संसाधन के अभाव मे अपनी शिक्षा के साथ न्याय नहीँ कर पायी। मेरा संकल्प है कि बेडौल होते समाज को सुधारने मे अपना योगदान कर सकूँ।