महान क्रांतिकारियों में शुमार राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह आज ही हुई थी फाँसी

आज ही की तारीख में 1927 में भारत के महान क्रांतिकारियों में शुमार राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह को 19 दिसंबर फांसी दी गई थी । जहाँ बिस्मिल को गोरखपुर जेल वहीं अशफाक को फैजाबाद जेल में फांसी पर लटका दिया गया था । क्रान्तिकारी रोशन को इलाहाबाद की नैनी जेल में फाँसी दी गयी थी ।
काकोरी काण्ड में २२ अगस्त १९२७ को जो फैसला सुनाया गया उसके अनुसार राम प्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी व अशफाक उल्ला खाँ को आई०पी०सी० की दफा १२१(ए) व १२०(बी) के अन्तर्गत आजीवन कारावास तथा ३०२ व ३९६ के अनुसार फाँसी एवं ठाकुर रोशन सिंह को पहली दो दफाओं में ५+५ कुल १० वर्ष की कड़ी कैद तथा अगली दो दफाओं के अनुसार फाँसी का हुक्म हुआ। ठाकुर मनजीत सिंह राठौर ने सेण्ट्रल लेजिस्लेटिव कौन्सिल में काकोरी काण्ड के चारो मृत्यु-दण्ड प्राप्त कैदियों की सजायें कम करके आजीवन कारावास (उम्र-कैद) में बदलने का प्रस्ताव पेश किया। कौन्सिल के कई सदस्यों ने सर विलियम मोरिस को, जो उस समय संयुक्त प्रान्त के गवर्नर हुआ करते थे, इस आशय का एक प्रार्थना-पत्र भी दिया कि इन चारो की सजाये-मौत माफ कर दी जाये परन्तु उसने उस प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया। सेण्ट्रल कौन्सिल के ७८ सदस्यों ने तत्कालीन वायसराय व गवर्नर जनरल एडवर्ड फ्रेडरिक लिण्डले वुड को शिमला जाकर हस्ताक्षर युक्त मेमोरियल दिया जिस पर प्रमुख रूप से पं० मदन मोहन मालवीय, मोहम्मद अली जिन्ना, एन० सी० केलकर, लाला लाजपत राय, गोविन्द वल्लभ पन्त आदि ने अपने हस्ताक्षर किये थे किन्तु वायसराय पर उसका भी कोई असर न हुआ।

अपने जेल के दिनों में भगत सिंह जो गीत गाते थे उनमें भगत ने ये पद जोड़ा था कि-

इसी रंग में बिस्मिल जी ने “वन्दे-मातरम्” बोला,
यही रंग अशफाक को भाया उनका दिल भी डोला;
इसी रंग को हम मस्तों ने, हम मस्तों ने;
दूर फिरंगी को करने को, को करने को;
लहू में अपने घोला।

मेरा रँग दे बसन्ती चोला….
हो मेरा रँग दे बसन्ती चोला….

इस ऐतिहासिक मामले में ४० व्यक्तियों को भारत भर से गिरफ्तार[3] किया गया था। गिरफ्तारी के स्थान के साथ उनके नाम इस प्रकार हैं:


आगरा से
चन्द्रधर जौहरी
चन्द्रभाल जौहरी


इलाहाबाद से
शीतला सहाय
ज्योतिशंकर दीक्षित
भूपेंद्रनाथ सान्याल


उरई से
वीरभद्र तिवारी


बनारस से
मन्मथनाथ गुप्त
दामोदरस्वरूप सेठ
रामनाथ पाण्डे
देवदत्त भट्टाचार्य
इन्द्रविक्रम सिंह
मुकुन्दी लाल


बंगाल से
शचीन्द्रनाथ सान्याल
योगेशचन्द्र चटर्जी
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी
शरतचन्द्र गुहा
कालिदास बोस


एटा से
बाबूराम वर्मा


हरदोई से
भैरों सिंह


जबलपुर से
प्रणवेशकुमार चटर्जी


कानपुर से
रामदुलारे त्रिवेदी
गोपी मोहन
राजकुमार सिन्हा
सुरेशचन्द्र भट्टाचार्य


लाहौर से
मोहनलाल गौतम
लखीमपुर से
हरनाम सुन्दरलाल


लखनऊ से
गोविंदचरण कार
शचीन्द्रनाथ विश्वास


मथुरा से
शिवचरण लाल शर्मा


मेरठ से
विष्णुशरण दुब्लिश
पूना से
रामकृष्ण खत्री


रायबरेली से
बनवारी लाल


शाहजहाँपुर से
रामप्रसाद बिस्मिल
बनारसी लाल
लाला हरगोविन्द
प्रेमकृष्ण खन्ना
इन्दुभूषण मित्रा
ठाकुर रोशन सिंह
रामदत्त शुक्ला
मदनलाल
रामरत्न शुक्ला


फरार क्रान्तिकारियों में से दो को पुलिस ने बाद में गिरफ़्तार किया था। उनके नाम व स्थान निम्न हैं:

दिल्ली –

  • अशफाक उल्ला खाँ

भागलपुर –

  • शचीन्द्रनाथ बख्शी

उपरोक्त ४० व्यक्तियों में से तीन लोग शचीन्द्रनाथ सान्याल बाँकुरा में, योगेशचन्द्र चटर्जी हावडा में तथा राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी दक्षिणेश्वर बम विस्फोट मामले में कलकत्ता से पहले ही गिरफ्तार हो चुके थे और दो लोग अशफाक उल्ला खाँ और शचीन्द्रनाथ बख्शी को तब गिरफ्तार किया गया जब मुख्य काकोरी षड्यन्त्र केस का फैसला हो चुका था। इन दोनों पर अलग से पूरक मुकदमा दायर किया गया।


मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा कि वीर बलिदानी रामप्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ एवं ठाकुर रोशन सिंह के बलिदान दिवस पर भावभीनी श्रद्धांजलि। यह राष्ट्र सदैव आप अमर बलिदानियों का ऋणी रहेगा।

उपमुख्यमन्त्री दिनेश शर्मा ने कहा कि देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे पर झूलने वाले महान क्रांतिकारी पं. रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्‍ला खां और ठाकुर रोशन सिंह की पुण्‍यतिथि पर शत्-शत् नमन |

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि शहीद रामप्रसाद बिस्मिल,शहीद अशफाकुल्ला खान, शहीद रोशन सिंह, शहीद राजेंद्र लाहिड़ी और ऐसे ही असंख्य नाम जो बलिदान व सर्वस्व न्यौछावर करने के पर्याय बन गए। उन्हें हृदय से नमन। स्वयं को भारत वर्ष पर संपूर्ण रूप से समर्पित कर देना ही हमारी इन देशभक्तों के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।