शिवांकित तिवारी, जबलपुर, मध्यप्रदेश।
जहाँ आजकल शादियाँ भव्यता और दिखावे का प्रतीक बन चुकी हैं, वहीं जबलपुर के युवा दंपति आशीष और कल्याणी ने अपने विवाह को सामाजिक जागरूकता का अभियान बना दिया। 5 फरवरी 2026 (गुरुवार) को संपन्न इस विवाह समारोह ने यह संदेश दिया कि खुशियाँ केवल अपने लिए नहीं, समाज के लिए भी मनाई जा सकती हैं।
“A Celebration with a Purpose” – उद्देश्यपूर्ण विवाह
इस विवाह में केवल परंपराएँ नहीं निभाई गईं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी गई। निमंत्रण पत्र में ही मेहमानों से अपील की गई थी कि वे इस उत्सव को जागरूकता और जिम्मेदारी के साथ मनाएँ।
मुख्य संकल्प थे :– रक्तदान को बढ़ावा, अंगदान का संकल्प, वृक्षारोपण, भोजन की बर्बादी रोकना, जल संरक्षण, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक से दूरी, बिना पटाखों की बारात, पशु क्रूरता से बचाव, दहेज प्रथा का विरोध।
शिक्षित युवा, जागरूक सोच : आशीष, जो कि प्रतिष्ठित आईटी कंपनी Persistent Systems में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं, और कल्याणी, जो एक शिक्षिका हैं, दोनों ने अपने पेशे और शिक्षा से मिले मूल्यों को अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत में ही समाज सेवा से जोड़ दिया। आशीष के माता-पिता सब्ज़ियों के व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि कल्याणी के पिता इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सक हैं और उनकी माता सरकारी शिक्षिका हैं। दोनों परिवारों से मिले संस्कारों ने इस विवाह को एक सामाजिक संदेश का रूप दे दिया।
गणतंत्र दिवस पर रक्तदान शिविर : शादी से पहले 26 जनवरी 2026 (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर दूल्हा-दुल्हन और उनके मित्रों व परिवारजनों (सत्यम पटेल, अनन्त अग्रहरि, प्रियंका मेहरा, मनोज झारिया, रविकांत लोधी, राज पटेल, आकाश पटेल, आदित्य प्रजापति, सिद्धार्थ राजपूत, मेलविन पॉटर, शिवंकित तिवारी) ने जबलपुर ब्लड सेंटर में एक विशेष रक्तदान शिविर आयोजित किया। इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन के नए अध्याय की शुरुआत सेवा और मानवता से होनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार, एक यूनिट रक्त तीन लोगों की जान बचा सकता है; ऐसे में यह कदम समाज के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।
अंगदान का संकल्प : जीवन के बाद भी जीवन
रक्तदान के साथ-साथ इस जोड़े ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया। दोनों ने स्वेच्छा से अंगदान के लिए पंजीकरण कराने का संकल्प लिया है, जो जबलपुर स्थित Netaji Subhash Chandra Bose Medical College & Hospital में किया जाएगा। अंगदान वह महान कार्य है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति मृत्यु के बाद भी कई लोगों को नया जीवन दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक अंगदाता 8 लोगों की जान बचा सकता है और कई अन्य को नई आशा दे सकता है। यह निर्णय युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल शब्दों तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
पौधे बने रिटर्न गिफ्ट : इस विवाह की सबसे प्रेरणादायक पहल रही – पौधों को रिटर्न गिफ्ट के रूप में देना। बारात में आए सभी मेहमानों और सुहागलेन की रस्म में उपस्थित अतिथियों को पौधे भेंट किए गए। लेकिन यह केवल एक प्रतीकात्मक उपहार नहीं था; यह एक संकल्प था। आज जब जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण गंभीर समस्या बन चुके हैं, ऐसे में विवाह जैसे शुभ अवसर पर वृक्षारोपण का संकल्प एक नई सामाजिक परंपरा की शुरुआत कर सकता है। यदि हर विवाह में 100 पौधे भी लगाए जाएँ, तो एक वर्ष में लाखों नए पेड़ उग सकते हैं। यह पहल बताती है कि बदलाव की शुरुआत घर से ही होती है।
पशु क्रूरता से बचाव : अक्सर भारतीय शादियों में घोड़ी पर चढ़कर बारात निकालने की परंपरा है। लेकिन कई बार इस परंपरा में पशुओं को अत्यधिक शोर, रोशनी और भीड़ के कारण असुविधा और तनाव का सामना करना पड़ता है। दूल्हे ने इस परंपरा को संवेदनशीलता के साथ पुनर्परिभाषित किया। उन्होंने घोड़ी का उपयोग न करते हुए अपनी कार से बारात निकाली। यह कदम संवेदनशीलता और जागरूकता का प्रतीक बना।
बिना पटाखों की स्वच्छ बारात : बारात पूरी तरह बिना पटाखों के निकाली गई, जिससे ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचाव हुआ। यह साबित करता है कि खुशी मनाने के लिए शोर और धुआँ आवश्यक नहीं – सच्ची खुशी मुस्कान और संगीत में होती है। DJ पर अश्लील या भड़काऊ गीतों की जगह सामान्य गीतों को प्राथमिकता दी गई, जिससे वातावरण गरिमामय बना रहा।
इस विवाह की सबसे सशक्त और प्रेरणादायक पहल रही – दहेज प्रथा का पूर्ण बहिष्कार : आशीष और कल्याणी ने स्पष्ट घोषणा की कि विवाह किसी लेन-देन का सौदा नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो आत्माओं का पवित्र मिलन व समानता और सम्मान का बंधन है। भारत में दहेज प्रथा आज भी एक गंभीर सामाजिक समस्या है। ऐसे में जब पढ़े-लिखे युवा स्वयं आगे आकर दहेज का विरोध करते हैं, तो समाज को एक नई दिशा मिलती है।
एक नई सोच की शुरुआत : आशीष और कल्याणी की यह शादी केवल व्यक्तिगत उत्सव नहीं रही, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरक अभियान बन गई। यह पहल दर्शाती है कि यदि हर परिवार अपने शुभ अवसरों को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़े, तो सकारात्मक बदलाव की एक नई परंपरा शुरू हो सकती है। जब सोच बड़ी हो, तो शादी भी समाज बदलने का माध्यम बन सकती है।
यह विवाह बताता है कि बदलाव संभव है; बस एक साहसिक निर्णय की आवश्यकता है। आशीष और कल्याणी ने अपने जीवन की शुरुआत प्रेम, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी से की है। अब यह समाज पर है कि वह इस प्रेरणा को कितना आगे बढ़ाता है।