प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या स्नान के दिन की घटनाओं को लेकर मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे के भीतर दूसरा नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनके कृत्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया है तथा चेतावनी दी गई है कि यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मेला प्रशासन के अनुसार, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर जब संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ थी, उस समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी और बग्घी के साथ बिना अनुमति संगम की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस द्वारा रोके जाने के बावजूद कथित रूप से इमरजेंसी के लिए आरक्षित पांटून पुल पर लगे बैरियर को तोड़ा गया। प्रशासन का कहना है कि इस घटना से भगदड़ की स्थिति बन सकती थी और मेला क्षेत्र की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई।
इसी आधार पर जारी नोटिस में पूछा गया है कि उन्हें माघ मेले से हमेशा के लिए प्रतिबंधित क्यों न किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में शंकराचार्य की संस्था को दी गई भूमि और अन्य सुविधाएं रद्द की जा सकती हैं तथा भविष्य में मेला क्षेत्र में प्रवेश पर भी रोक लगाई जा सकती है।
विवाद यहीं तक सीमित नहीं रहा। मंगलवार सुबह कानूनगो अनिल कुमार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पहुंचे और वहां एक और नोटिस चस्पा किया गया। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया कि उन्होंने स्वयं को शंकराचार्य कैसे घोषित किया। प्रशासन ने मेले में “शंकराचार्य” लिखे बोर्ड लगाने पर भी आपत्ति जताई है और इसे न्यायालय के आदेशों का संभावित उल्लंघन बताया है।
मंगलवार रात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला प्रशासन को आठ पृष्ठों का विस्तृत जवाब भेजा। उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए चेतावनी दी है कि यदि उन्हें दिया गया नोटिस वापस नहीं लिया गया, तो वे मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे। इससे पहले मौनी अमावस्या के दिन पुलिस से धक्का-मुक्की के बाद वे अपने शिविर के बाहर धरने पर भी बैठ गए थे, जिससे मामला और तूल पकड़ गया।
इस पूरे विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सांसद डॉ. सच्चिदानंद साक्षी महाराज ने कहा कि चाहे माघ मेला हो, कुंभ या महाकुंभ—जहां भी भारी भीड़ होती है, वहां प्रशासन की सर्वोपरि जिम्मेदारी होती है कि आयोजन बिना किसी दुर्घटना के संपन्न हो। उन्होंने कहा कि वे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सम्मान करते हैं, लेकिन जहां पुलिस ने उनकी पालकी रोकी, वहां उन्हें अभद्रता नहीं करनी चाहिए थी।
सांसद ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वक्तव्यों से लगता है कि वे संत से अधिक राजनेता की भूमिका निभा रहे हैं। यदि वे राजनीति करना चाहते हैं तो खुलकर राजनीति करें। यह बयान उन्होंने गुरुवार को अपने आवास साक्षीधाम, गदनखेड़ा में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।
उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और कहा कि इस मामले में उन्हें कुछ न कहना ही बेहतर होगा, क्योंकि प्रयागराज में ही कभी इन्हीं संतों पर लाठियां चलवाई गई थीं। संतों के सम्मान के प्रश्न पर उन्होंने अतीत की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के उस बयान पर भी साक्षी महाराज ने सहमति जताई, जिसमें कहा गया था कि यदि मुस्लिम समाज सपा से हट जाए तो उसे चुनाव जीतना कठिन हो जाएगा। सांसद ने कहा कि आज यादव समाज का भी सपा से मोहभंग हो रहा है और मुस्लिम मतदाता भी भाजपा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्थन दे रहे हैं।
प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा यह विवाद अब केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक पद, न्यायालय के आदेश और राजनीतिक बयानबाजी के कारण व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है और यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।