सम्पूर्ण निष्ठा और समर्पण का परिणाम रहा, टी-२० विश्वकप पर जीत का मोहर लगा देना!

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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८ मार्च की तारीख़ भारतीय क्रिकेट की दृष्टि से देश को गौरवान्वित करनेवाली थी और सबकी निगाहेँ गुजरात के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम की पिच पर संध्या ७ बजे स्थिर हो गयी थीँ।तमाम अटकलोँ को ख़ारिज़ करते हुए, जब भारत ने टी-२० विश्वकप के फ़ाइनल मे न्यू ज़ीलैण्ड को एकतरफ़ा से दिख रहे मुक़ाबले मे ९६ रनो से मात देकर भारतीय दल लगातार दूसरी बार विश्वकप को चूमा तब मानो घड़ी भी कुछ देर के लिए ठिठक कर रह गयी थी।

अभिषेक शर्मा की लगातार विफलता को देखते हुए, उन्हेँ फ़ाइनल मे रखा जाये वा नहीँ, इस पर बहुत मन्थन किया गया था; अन्तत:, उन्हेँ मौक़ा दिया गया और उन्होँने अतीत पृष्ठोँ को नज़रअन्दाज़ करते हुए, एक ऐसे पृष्ठ पर अपने पराक्रम और कौशल के हस्ताक्षर कर दिये, जो अमिट हो गया है और स्वर्णाक्षरोँ मे गुजरात के नरेन्द्र मोदी स्टेडियम के चारोँ ओर चमक रहा है। टी-२० विश्वकप के इतिहास मे ऐसा पहली बार हुआ कि प्रारम्भिक तीनो बैटर अर्द्धशतक बनाये। इतना ही नहीँ, पॉवर-प्ले मे बिना किसी क्षति के ९२ रनो का स्कोर खड़ा करना भी एक कीर्तिमान बन गया है।

न्यूज़ीलैण्ड के कप्तान सैण्टनर ने टॉस जीता और पहले क्षेत्ररक्षण करने का निर्णय किया, जो कुछ हद तक सही नहीँ भी लग रहा था; क्योँकि पिच ऐसी बनायी गयी थी, जिसपर आसानी से बल्लेबाज़ी की जा सकती थी। यही कारण है कि जब संजू सैम्सन, अभिषेक शर्मा और ईशान किशन बल्लेबाज़ी कर रहे थे तब गेंदबाज़ी बहुत ही सामान्य स्तर की दिख रही थी। आरम्भ के एक-दो ओह्वर तक भारतीय बैटरोँ ने गेंदोँ के स्वभाव को समझा, उसके बाद उनके तेवर बदले और छक्के-चौके से दर्शकोँ और श्रोताओँ का भरपूर मनोरंजन होता रहा।

संजू सैम्सन, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन और शिवम दुबे के बल्ले का कमाल था कि भारतीय दल का स्कोर २५० से पार चला गया था। एक समय वह भी था, जब भारत का स्कोर ३०० रन के लगभग दिख रहा था। चारोँ ने उम्दा प्रदर्शन किये था, जबकि कप्तान सूर्यकुमार यादव ने आते ही लापरवाही भरा शॉट खेलकर भारत को लगभग ५० रन पीछे खीँच लिये; क्योँकि उसके बाद ‘आया राम-गया राम’ का नज़ारा दिखता रहा।

१६ वेँ ओह्वर मे २०४ की रनसंख्या पर भारत के ४ विकेट गिर चुके थे। समझ मे नहीँ आ रहा था कि न्यू ज़ीलैण्ड के गेंदबाज़ नीशम ने भारतीय बैटरोँ पर कौन-सा जादू कर दिया है, जो अचानक एक-के-बाद-एक तीन विकेट– संजू सैम्सन, ईशान और सूर्यकुमार यादव के गिरते रहे। उसके बाद उसी स्कोर पर डफ़ी के गेँद पर हार्दिक पाण्ड्या का कैच छूटा था। तीनो ने अनावश्यक शॉट लगाये थे। थोड़ा ठहर लेना था; क्योँकि रन तो बन ही रहे थे। संजू सैम्सन ने भी अपने पिछले अन्दाज़ मे फ़ाइनल मे अर्द्धशतकीय पारी (४६ गेंदोँ मे ८९ रन) खेली थी। अभिषेक ने २१ गेंदोँ मे अर्द्धशतक बनाये थे। ईशान ने भी अर्द्धशतक (२५ गेंदोँ मे ५४ रन) बनाकर अपनी क़ाबिलीयत बता और दिखा दी थी। तीनो की बिन्दास बल्लेबाज़ी का ही नतीजा था कि भारतीय दल का स्कोर वहाँ तक पहुँच चुका था, जिसकी किसी ने उम्मीद तक नहीँ की थी। सूर्यकुमार बिना सोचे-समझे छक्का लगाने के चक्कर मे विकेट खो दिये। तब ऐसा नहीँ लग रहा था कि भारतीय खेल रहे थे। भविष्य मे सूर्यकुमार यादव के विकल्प पर विचार करना होगा, जोकि यशस्वी जायसवाल के रूप मे दिख रहा है।

हार्दिक को आक्रामक प्रदर्शन करने के लिए पहले ही भेजा गया था; परन्तु वे निष्क्रिय दिखते रहे, जिसका परिणाम रहा कि आख़िरी १४ गेंदोँ मे तीन विकेट की क्षति पर मात्र ९ रन बने। जो स्कोर ३०० रन तक दिख रहे थे, पूरी तरह से सिकुड़ गये। तीनो के आउट होते ही रनो के लाले पड़ते दिखते रहे। न्यू

ज़ीलैण्ड के गेंदबाज़ोँ ने १५वेँ ओह्वर से रनो पर अंकुश लगा दिये थे। एक समय था, जब भारतीय दल का रन-औसत १५-१६ का था। गेंदबाज़घ मे न्यू ज़ीलैण्ड की अप्रत्याशित वापसी दिख रही थी। तीनो को संयमित रहना था; पर बहक गये थे। हेनरी ने हार्दिक को चलता कर दिया था। गेंदबाज़ यॉर्कर से दूर रहकर गेंदोँ पर तरह-तरह से अँगुलियाँ फेरते हुए कमाल की गेंदबाज़ी करते दिख रहे थे। पिछले चार ओह्वरोँ (१६ से १९) मे मात्र २८ रन आये थे।

बारी शिवम दुबे की थी, जिन्होँने आख़िरी ओह्वर मे चार गेंदोँ मे २४ रन (दो छक्का और तीन चौका) बनाकर भारत को २५५ रनो तक पहुँचा दिया था, जो पिछले चार ओह्वर पहले बना पाना बहुत मुश्किल दिख रहा था। इसप्रकार शिवम ने मात्र ८ गेंदोँ मे अविजित २६ रन बनाकर अपने होने को सिद्ध कर दिखाया है।

बेशक, भारत ने २५५ रनो का स्कोर बनाकर मनोवैज्ञानिक लाभ ले लिया था।

न्यू ज़ीलैण्ड की पारी शुरू हो चुकी थी। भारतीय गेंदबाज़ उनपर प्रभावी दिख रहे थे। भगरतीय दल को तब एक ज़ोरदार झटका लगा था जब अर्शदीप सिँह के पहले ओह्वर के पाँचवेँ गेंद पर शिवम दुबे ने साइफ़र्ट का एक आसान-सा कैच छोड़ दिया था। साइफ़र्ट ख़तरनाक बैटर हैँ, जिन्हेँ जीवनदान करने का परिणाम था कि साइफ़र्ट ने हार्दिक पाण्ड्या के गेंद पर लगातार दो छक्के लगा दिये थे। हार्दिक के पहले ओह्वर मे २१ रन बनाकर न्यू ज़ीलैण्ड के बैटरोँ, विशेषकर साइफ़र्ट ने अपना इरादा ज़ाहिर कर दिया था। एलन जिस बल्ले से आकर्षक प्रदर्शन कर रहे थे, उसे बदलकर दूसरा बल्ला ले लिया और अक्षर पटेल के अगले ही गेंद तिलक वर्मा को कैच थमा बैठे। जो रचिन रवीन्द्र उद्घाटक बैटर के लिए जाने जाते रहे हैँ, पहले विकेट गिरने के बाद आये; परन्तु जसप्रीत बुमराह के पहले ही गेंद पर उनका ज़ोरदार कैच लाँग-ऑन पर खड़े ईशान किशन ने लपक लिया था, यद्यपि गेंद छिटका था तथापि ईशान ने उसे दूसरे प्रयास मे जकड़ लिया।

पाँचवेँ ओह्वर के पाँचवेँ गेंद मे अक्षर पटेल ने ख़तरनाक दिख रहे फ़िलिप्स को पैवेलियन का रास्ता दिखा दिया था।
‘पॉवर-प्ले’ मे बड़ी संख्या मे रनो का बनना और विकेट बचाये रखना का बहुत महत्त्वपूर्ण होता है; परन्तु न्यू ज़ीलैण्ड पॉवर-प्ले मे भारत की तुलना मे बहुत पीछे दिख रहा था। उसके पॉवर-प्ले मे ५२ रनो मे ३ विकेट गिर चुके थे। साइफ़र्ट का कैच छोड़ना महँगा रहा; क्योँकि साइफ़र्ट ने मात्र २३ गेंदोँ मे ५० रन बना लिये थे। हार्दिक पाण्ड्या बल्लेबाज़ी मे कुछ ख़ास नहीँ कर पाये; परन्तु उन्होँने चैपमैन को क्लीन बोल्ड कर दिया था; यद्यपि उनका पहला ओह्वर बहुत महँगा रहा। अपने पहले ओह्वर मे १५ रन देनेवाले वरुण चक्रवर्ती भी महँगे रहे; परन्तु उन्होँने भी आक्रामक दिख रहे साइफ़र्ट को ईशान किशन के हाथोँ कैच कराकर बहुमूल्य विकेट ले लिया था। इसतरह से न्यू ज़ीलैण्ड के आधे बैटर ९ ओह्वरोँ के खेल मे ८३ रनो के स्कोर पर पैवेलियन मे पहुँच चुके थे।

जब न्यू ज़ीलैण्ड के पाँच विकेट हो चुके थे तब टी० ह्वी० स्क्रीन पर महेन्द्र सिँह धोनी, रोहित शर्मा, कपिल देव और जय शाह के चेहरे दिखाये गये।

ग्यारहवेँ ओह्वर के पाँचवेँ गेंद पर उस समय एक अप्रिय दृश्य दिखा, जब डैरिक मिचेल की बल्लेबाज़ी करते समय उनके शॉट लगाने के बाद अर्शदीप ने ऑफ़ स्टम्प पर खड़े मिचेल की ओर अनावश्यक रूप से तेज़ी मे गेंद फेँका था, जिसे लेकर मिचेल ने अम्पायर से शिकायत की थी, फिर भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव और अर्शदीप ने मिचेल से हाथ मिलाकर विवाद को शान्त कराया।

जब न्यू ज़ीलैण्ड के महारथी ‘आयाराम-गयाराम’ की भूमिका मे दिखते रहे तब कप्तान सैण्टनर ने कप्तानी पारी खेली; परन्तु तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

तेरहवाँ ओह्वर बहुत रोचक था, जिसमे अक्षर के पहले गेंद पर हार्दिक ने डैरिक मिचेल का एक आसान-सा कैच छोड़ा और दूसरे मे एक ख़राब क्षेत्ररक्षण करके चार रन दे दिये; परन्तु ईशान किशन ने नहीँ बख़्शा था। उन्होँने अक्षर के ही गेंद पर मिचेल के कैच को लपक लिया। अक्षर पटेल की गेंदबाज़ी शानदार रही, जिन्होँने तीन ओह्वरोँ मे २७ रन देकर ३ विकेट झटके थे।

इसतरह उन्नीसवेँ ओह्वर मे न्यू ज़ीलैण्ड के ६ विकेट गिर चुके थे और भारतीय दल अपने देश मे पहली बार टी-२० विश्वकप जीतने की ओर अग्रसर दिख रहा था।

सोलहवेँ ओह्वर के तीसरे गेंद पर जसप्रीत बुमराह ने सातवेँ विकेट के रूप मे नीशम को और चौथे गेंद पर मैथ्यू हेनरी को यॉर्क कराकर भारत की जीत का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। वही नीशम थे, जिन्होँने तीन आक्रामक प्रदर्शन करनेवाले भारतीय बल्लेबाज़ोँ को लगातार आउट करते रहे।

इसप्रकार न्यू ज़ीलैण्ड ने सत्रहवेँ ओह्वर मे ८ विकेटोँ पर १४३ रन बना लिये थे। उन्नीसवेँ ओह्वर मे न्यू ज़ीलैण्ड के ९ विकेट गिर चुके थे। अन्तत: न्यू ज़ीलैण्ड उन्नीसवेँ ओह्वर मे मात्र १५९ रनो पर ऑल-आउट हो चुका था और भारत लगातार दो बार विश्वकप जीतनेवाला विश्व का प्रथम देश बन चुका था; मगर अब तीसरी बार (वर्ष २००७, २०२४ और २०२६) टी-२० विश्वकप जीतकर विश्व का प्रथम देश होने का गौरव अर्जित कर लिया है।

यदि दो आसान कैचोँ के छोड़ने को अलग करके देखेँ तो कुल मिलाकर, भारतीय खेलाड़ियोँ का क्षेत्ररक्षण प्रभावकारी था। ईशान किशन का क्षेत्ररक्षण देखते ही बन रहा था। बुमराह की गेंदबाज़ी क़ह्र ढा रही थी, जिन्होँने टी-२० विश्वकप मे पहली बार ४ विकेट ले लिये थे। उन्होँने मात्र १५ गेंदोँ मे ४ विकेट लेकर भारतीय चौखट पर विश्वकप को सरका दिया था।

उन्नीसवाँ ओह्वर अभिषेक शर्मा को दिया गया था, जिसे उन्होँने न्यू ज़ीलैण्ड का अन्तिम विकेट लेकर भारतीय दल को विजयश्री के द्वार पर विश्वकप को चूमते हुए दिखा दिया, तब न्यू ज़ीलैण्ड ने उन्नीसवेँ ओह्वर मे आल-आउट होकर मात्र १५९ रन बना पाये थे।

इस विश्वकप पर अधिकार कर लेने के बाद भारतीय दल की यशस्विता का परचम विश्व-क्रिकेट मे लहरा तो रहा ही है, खेलाड़ियोँ को मालामाल भी कर रहा है। विजेता भारतीय दल को २७ करोड़ ५ लाख रुपये (३ मिलियन डॉलर) दिये गये हैँ, जबकि उपविजेता न्यू ज़ीलैण्ड-दल को १४ करोड़ ७ लाख रुपये (१.६ मिलियन डॉलर) दिये गये हैँ। इस पूरे टूर्नामेण्ट मे सर्वोत्तम प्रदर्शन करनेवाले संजू सैम्सन को ‘प्लेयर ऑव़ द टूर्नामेण्ट’ घोषित किया गया।

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