— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
प्रधानमन्त्री, गृहमन्त्री, रक्षामन्त्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तथा वायुसेना-प्रमुख इस अति गम्भीर विषय पर फँस चुके हैं।
अर्णब ने बार्क के पूर्व-प्रमुख अधिकारी पार्थो दास गुप्ता से उक्त विषय पर ह्वाट्सऐप चैट पर वार्त्ता की है, जो कि अब सार्वजनिक हो चुका है; परन्तु देश के लगभग सभी समाचार-चैनल इस अति गम्भीर विषय पर मौन हैं। ह्वाट्सऐप चैट पर अर्णब गोस्वामी पार्थो दास गुप्ता से इस आशय की बात कर रहा है– इस बार पाकिस्तान पर भारत की सेना ‘स्ट्राइक’ करेगी, जो बहुत भयंकर होगा। इस पर पार्थो कहता है– यह समाचार मोदी को चुनाव जिताने में सहायक सिद्ध होगा। ये बातें बालाकोट की घटना घटने के चार दिनों-पूर्व की हैं। अब प्रश्न है– बालाकोट-घटना से पूर्व अर्णब को इसकी जानकारी का स्रोत क्या था? पार्थो दास गुप्ता को पहले ही गिरिफ़्तार कर लिया गया था, जबकि अर्णब अपने चैनल पर गुण्डागर्दी करते हुए, “डंके की चोट पर” बना हुआ है।
इतना ही नहीं, अनुच्छेद ३७० के कुछ भाग को हटाने से पहले अर्णब गोस्वामी को इसकी सूचना कैसे मिली थी कि जम्मू-कश्मीर से उक्त अनुच्छेद के कुछ महत्त्वपूर्ण हिस्सों को हटा दिया जायेगा। आश्चर्य है कि कथित मोदी-सरकार के इशारे पर ग़लत तरीक़े से बड़ी संख्या में निरपराध लोग गिरिफ़्तार किये जा चुके हैं और इस संवेदनशील विषय पर ‘एन० आइ० ए०’ मौन है। वह उस चैट की जाँच क्यों नहीं कर रही है?
स्मरणीय है कि मात्र ‘ह्लाट्सऐप चैट’ के आधार पर ‘सुशान्त सिंह हत्या-काण्ड’ का प्रचार-प्रसार किया गया था और उसे लेकर तथाकथित ‘गोदी मीडिया’ ने देश की जनता को विचलित कर रखा था। ऐसे में, यह प्रश्न सहज ही उठ खड़ा होता है– प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, गृहमन्त्री अमित शाह, रक्षामन्त्री राजनाथ सिंह तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कथित देशद्रोही पत्रकार अर्णब गोस्वामी के साथ किस प्रकार का सम्बन्ध है? ‘राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम’ के अन्तर्गत उसे गिरिफ़्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? इस विषय पर ‘न्यू इण्डिया की मोदी-सरकार’ अभी तक चुप्पी क्यों साधे हुए है?
वर्तमान केन्द्रीय सरकार के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने आज (२० जनवरी) ‘पत्रकार-वार्त्ता’ की; परन्तु ‘राष्ट्रीय सुरक्षा गोपनीय अधिनियम’ का हनन करनेवाले कलंकी पत्रकार अर्णब गोस्वामी के राष्ट्रघाती कृत्य पर मौन रहे।
उल्लेखनीय है कि कथित पत्रकार अर्णब गोस्वामी से पार्थो दास गुप्ता ‘ह्वाट्सऐप चैट’ पर पूछता है– मुझे पी०एम०ओ० में रखवाने के विषय में कितनी प्रगति हुई है? ऐसा मनबढ़ और देशद्रोही पत्रकार भारत राष्ट्र की सुरक्षा और अखण्डता के लिए महाघातक है।
अब मुख्य प्रश्न है, जो अति संवेदनशील विषय देश के राजनीतिक परिदृश्य में उभरा है, उससे देश की सैन्य रणनीति को भी अत्यन्त आघात पहुँचा है। इसके लिए मुख्यत: प्रधानमन्त्री, गृहमन्त्री, रक्षामन्त्री तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सीधे उत्तरदायी हैं और इन पाँचों से भी स्पष्टीकरण माँगा जाना चाहिए, अन्यथा देश की निजता पूरी तरह से संकट में पड़ सकती है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २० जनवरी, २०२१ ईसवी।)
