● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
इन्दौर मे दक्षिणअफ़्रीका की ओर से २० ओवरों मे ३ विकेटों पर बनाये गये कुल २२७ रनों का पीछा करते हुए, भारतीय बल्लेबाज़ों की हालत पतली हो चुकी थी। दूसरे वाक्य मे कहें तो दक्षिणअफ़्रीका ने भारत को बुरी तरह से पराजित कर दिया है।
भारतीय बल्लेबाज़ों मे “आयाराम-गयाराम” की भूमिका निभाने की होड़ लग चुकी थी। लगभग सभी बल्लेबाज़ अपनी ही ग़लतियों के कारण हारे हुए जुवारी की तरह से पैवेलियन मे उलटे पाँव चलते हुए दिखे।
कप्तान रोहित शर्मा अपनी मूर्खतापूर्ण बल्लेबाज़ी के कारण विफल रहे। वे खड़े-खड़े शॉट खेलना चाहते थे, जबकि उन्हें अपने पाँवों को चलाने थे। ऋषभ पन्त जब छक्के और चौके लगा चुके थे तब अतिरिक्त जोख़िम लेने की आवश्यकता ही क्या थी? श्रेयस अय्यर १ रन बनाये और चलते बने। दिनेश कार्तिक छक्के लगा चुके थे और चौक्के भी, फिर ग़लत शॉट खेलने के कारण उनके स्टम्प उखड़ गये। सूर्यकुमार यादव की चमक को दक्षिणअफ़्रीका के गेंदबाज़ों ने बिखरने नहीं दिया, फलत: वे भी सस्ते मे निबटा दिये गये।
इन्दौर का मैदान ‘बल्लेबाज़ों का स्वर्ग’ माना जाता है, इसे दक्षिणअफ्रीका के बल्लेबाज़ों ने सिद्ध कर दिखाये। दक्षिणअफ़्रीका के बल्लेबाज़ों, ख़ासकर राइली रूसो ने २०८.३३ के औसत से मात्र ४८ गेंदों मे १०० रन बनाकर हर भारतीय गेंदबाज़ की गेंदों की ऐसी बधिया उधेड़ी है कि भारतीय खेमा, विशेष रूप से उसके ‘हेड कोच’ और कप्तान की आज की रात दुश्वारी मे कटेगी।
भारत का एक भी गेंदबाज़ ऐसा नहीं दिखा था, जो कुछ असर छोड़ सके। क्विण्टन डिकॉक ने अपने शानदार अर्द्धशतक (४३ गेंदों मे ६८ रन) जिस अन्दाज़ मे खेलते हुए बनाये थे, उसे देखकर भारतीय गेंदबाज़ पनाह मागते दिख रहे थे। ऐसा लग ही नहीं रहा था कि भारतीय खिलाड़ी दक्षिणअफ़्रीका के विरुद्ध खेल रहे थे। यह अलग विषय है कि दक्षिणअफ़्रीका तीन मैचों की यह शृंखला २-१ हार चुकी है; किन्तु दूसरे और तीसरे मैचों मे जिस आक्रामकता के साथ उसने वापसी के संकेत किये हैं, उससे भारतीय दल जल्दी उबर नहीं पायेगा। भारत ने पहले टी-२० मैच मे जैसी दुर्दशा दक्षिणअफ़्रीका की की थी, ठीक वही स्थिति दक्षिणअफ़्रीका ने भारत के लिए भी उत्पन्न कर दी थी। यही कारण है कि १८.३ ओवरों मे सभी भारतीय खिलाड़ी मिलकर केवल १७८ रन बना सके थे, परिणामत: २२७ रनो का पीछा करते हुए, भारतीय खिलाड़ी बेदम दिख रहे थे और ४९ रनो से पराजित होकर पैवेलियन लौटे। भारत का एक भी खिलाड़ी अर्द्धशतक तक न बना सका।
इस खेल का एक अन्य पक्ष यह है कि अब जो हो चुका सो हो चुका, भारतीय कप्तान को दक्षिणअफ़्रीका के साथ ही कुछ दिनो-बाद खेले जानेवाले एकदिवसीय अन्तरराष्ट्रीय मैच के लिए ‘नेट अभ्यास’ कर परिपक्वता अर्जित करनी होगी, ताकि ‘टी-२०’ विश्वकप के लिए सुदृढ़ तैयारी दिखे।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ४ अक्तूबर, २०२२ ईसवी।)