● आचार्य पण्डित पृथ्वीनाथ पाण्डेय
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पुरुषहॉकी-विश्वकप– २०२६ मे न्यूज़ीलैण्ड ने भारत को ३-१ से पराजित कर, भारत को टूर्नामेण्ट से बाहर कर दिया है। भारतीय दल की पराजय के लिए उसके खेलाड़ियोँ मे आपसी संतुलन और सामंजस्य का अभाव रहा। भारतीय दल मे आक्रमण और रक्षा करने मे संतुलन का पूर्णत: अभाव देखा गया। भारतीय दल पेनॉल्टि कॉर्नर को गोल मे बदलने मे विफल सिद्ध हुआ। भारत को सर्वाधिक सात पेनॉल्टि कॉर्नर मिले थे, जिनमे से एक ही गोल हो पाया था। जिस भारतीय कप्तान और सरपंच हरमनप्रीत सिँह को पेनॉल्टि कॉर्नर से गोल करनेवाला विश्व का सर्वश्रेष्ठ खेलाड़ी बताया जाता है, वह सात पेनॉल्टि कॉर्नर मे से मात्र एक को गोल मे बदल सका था।
खेल के पूर्वार्द्ध मे भारतीय दल केवल रक्षात्मक प्रदर्शन करता देखा गया था, जबकि नीदरलैण्ड्स की ओर से दो गोल हो जाने के बाद वह आक्रामक हो गया; परन्तु रक्षात्मक पक्ष को भूल गया था। इस तरह से भारत अपने समूह की अंकतालिका मे फिसड्डी दिख रहा है। भारतीय दल के लिए सेमी फ़ाइनल की राह बहुत ही मुश्किल हो चुकी है; क्योँकि इसके लिए भारतीय दल को २४ अगस्त को अर्जेण्टीना के साथ प्रदर्शन करते समय उसे छ: से अधिक गोलोँ से पराजित करना होगा; साथ ही इंग्लैण्ड को अपने दोनो ही मैच हारने होँगे। अब कल्पना करेँ– क्या ऐसा हो पायेगा? अब कोई चमत्कार ही भारतीय दल को बचा पायेगा।
भारतीय दल के खेलाड़ी सही समय पर सही खेलाड़ी को पास देने मे सफल नहीँ रहे। यही कारण है कि भारतीय दल कम-से-कम तीन गोल करने से वंचित रहा। यह वही नीदरलैण्ड्स है, जिसकी खेलाड़िनो ने भारतीय महिला-दल को पराजित कर, उसकी सेमी फ़ाइनल की राह को बहुत मुश्किल कर दिया है।
नीदरलैण्ड्स के खेलाड़ियोँ ने मैदानी गोल किये थे और पेनॉल्टि कॉर्नर से भी। उसकी आक्रमण और रक्षापंक्ति मे संतुलन बना रहा। भारतीय पुरुषदल को अपने प्रदर्शन को देखना-समझना होगा और अपनी ग़लतियोँ से सीख ग्रहण करनी होगी, अन्यथा उसकी पराजय का क्रम बना रहेगा।
(सर्वाधिकार सुरक्षित – आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २२ अगस्त, २०२६ ईसवी।)