जब गरीब के सभी रास्ते बंद हो जाते तो राजवर्धन सिंह राजू इंसानियत का रिश्ता निभाते हैं

राज चौहान ब्यूरो हरदोई-


आपको बतातें चलें कि राजवर्धन सिंह अभी तक 72 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करा चुके हैं और एक नशा मुक्ति केंद्र भी चलाते हैं, इसके साथ भी बहुत अन्य कार्य हैं जो राजवर्धन सिंह इंसानियत के रिश्ते को समाज मे स्थापित करने के लिए निस्वार्थ रूप से करते हैं।

गरीब और असहाय हरदोई के लोगों के जुवां पर अब सिर्फ़ राजवर्धन के नाम की आस बंधती है, ऐसी ही एक घटना आज घटित हुई जब राजवर्धन सिंह के फोन पर मुक्तिधाम वाले कल्लू नाम के शख्स की घंटी बजी, राजवर्धन समझ चुके थे कि कोई लावारिस लाश ही है और उन्होंने पूँछा की किस थाने से संबंधित लाश है, कल्लू का उधर से जवाब आज कुछ अलग ही आ रहा था बोला बाहर की लाश है पर लावारिस नही है।

हमेशा की तरह इंसानियत के रिश्ते को निभाने राजवर्धन निकल पड़े , जब अस्पताल पंहुचे तो एक बुजुर्ग शख्स अपने ही शरीर से भारी , गिड़गिड़ाते हुए दोनों हाथ जोड़े हुए, आँखों मे आँसू लिए बोले कि मेरा बेटा ख़त्म हो चुका है, मेरा नाम रामकिशन कश्यप है और मैं ज़िला महोबा के थाना मोकन्द क्षेत्र के पायारा गांव का रहने वाला हूं, मुझे जीआरपी के थाने से फोन आया कि आपके बेटे की मृत्यु हो गई है किसी ने एसिड डालकर जलाया है। मेरी इच्छा है कि अपने बेटे का अंतिम संस्कार मैं अपने गांव में करूँ पर आज न मेरे पास मेरा बेटा है ना ही उसकी लाश को ले जाने के लिए पैसे।

राजवर्धन ने उस बुड्ढे शख्स के कंधे पर हाथ रखा और बोले आप पोस्टमार्टम कराइये मैंने गाड़ी की व्यवस्था कर दी है, पैसे की चिंता न करिये गाड़ी का पेमेंट कर दिया है।

ऐसे ही कामो के लिए राजवर्धन का नाम धीरे-2 ज़िले के बाहर के गरीब लोगों की जुवां  मसीहा के रूप में आने लगा है।