कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिलाधिकारी पुलकित खरे की अध्यक्षता में गोशाला संरक्षण समिति की बैठक सम्पन्न हुई। उन्होने कहा कि हमारे देश में गाय को माॅ का दर्जा दिया गया है। जिस प्रकार एक माॅ अपने बच्चे पर सर्वस्व बलिदान करती है उसी प्रकार एक गाय भी अपने जीवनकाल में अनेको उपयोगी पदार्थ देकर अपने समाज का भला करती है। इनके संवर्धन एवं सृजन के लिए जनपद में कार्यरत गोशालाओ का सुचारू रूप से संचालन किया जाये। गोशालाओं से सम्बन्धित विवादित भूमि के वादो का निस्तारण तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से गोशालाओ का अवस्थापना विकास तथा चरागाहो को स्थापित किया जाये। उन्होने सम्बन्धित विभागो से कहा कि गोशालाओ को स्वावलम्बन की ओर बढ़ाने के लिए बायोगैस, कम्पोस्ट, पंचगव्य से बनाये जाने वाले विभिन्न पदार्थो यथा साबुन, अगरबत्ती, मच्छर भगाने की क्वायल, गोनाइल ओषधियों आदि के उत्पादन एवं विक्रय में सहायता प्रदान कराये।
उन्होने कहा कि गोशालाओ को केन्द्र बनाते हुए आस पास के क्षेत्र में गौ आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी का विकास कराये जिससे कृषि विभाग एवं उद्यान विभाग आस पास के किसानो को गौशाला से गोबर व गौमूत्र से बने खाद व कीट नाशक का उपयोग कर जैविक कृषि एवं बागवानी को बढावा मिल सके। इससे किसानो की उत्पादता बढने के साथ ही अच्छा मूल्य मिलेगा तथा गोबर व गोमूत्र के सदुपयोग होने से गोशालाओ की आय मे बढ़ोत्तरी होगी तथा जन सामान्य बेहतर खाद्यान्न फल सब्जी आदि प्राप्त कर सकेंगे। गोशालाओ को संरक्षित करने के लिए कृषि विभाग, उद्यान विभाग, एवं वन विभाग की अहम भूमिका सामने आती है। गोशालाओ के लिए जन मानस को जागरूक करना होगा तथा गोशालाओ के उत्पादो से जनपद वासियो को अवगत कराना होगा। बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सहित अन्य विभागो के अधिकारी एवं गोशालाओ के संचालक उपस्थित रहे।