आकांक्षा मिश्रा
प्रेम का अनुभव रसरूपक
विचित्र भावो का द्योतक है
तुम प्रेम में कहा तक सफल हुए
यह विस्तारण भावो का
तुम कठिन हुए हर मोड़ पर जीवन के
कब सरल रहे , कहा मलिन हुए वैभव में
रज-कण का अनुभव है
यह प्रेम तपोभूमि का संगम है
मन का संयम अनुकूल धैर्यता यह कैसी कठिन परीक्षा ?
जब पूर्ण समर्पण भाव
लिए प्रेम की राह में ॥