पिण्टू कुमार पाल-
आसमां भी आपका,
जमी भी आपकी,
हौसला भी आपका,
उड़ान भी आपकी,
उड़ो तो आसमान की ऊँचाई नाप दो,
गिरो तो समंदर की गहराई नाप दो.
भरो तुम बहुत ऊँची उड़ान,
पर जमीं पर ही रखना अपना ध्यान,
वापस तो जमीं पर ही आना है,
खुले आसमान मै कहाँ ठिकाना है ।।
पिण्टू कुमार पाल-
आसमां भी आपका,
जमी भी आपकी,
हौसला भी आपका,
उड़ान भी आपकी,
उड़ो तो आसमान की ऊँचाई नाप दो,
गिरो तो समंदर की गहराई नाप दो.
भरो तुम बहुत ऊँची उड़ान,
पर जमीं पर ही रखना अपना ध्यान,
वापस तो जमीं पर ही आना है,
खुले आसमान मै कहाँ ठिकाना है ।।