सारस्वत मित्र डॉ० क्षमाशंकर पाण्डेय जी एक कुशल अध्येता थे

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक कुशल अध्येता और कई महाविद्यालयों में हिन्दी-विषय के प्राध्यापन करने के बाद घर में रहकर साहित्य-अनुशीलन में व्यस्त रहनेवाले डॉ० क्षमाशंकर पाण्डेय जी का देहावसान कल (१२ मई) हो गया था। उन्होंने कई साहित्यिक कृतियों के भी प्रणयन किये थे, जिनमें ‘नये सवाल मिले’, ‘भारतीय नारीवाद : स्थिति और सम्भावना’, ‘धूमिल’, ‘रामकथा : विविध संदर्भ’, ‘हर गवाही आपकी’ आदिक सम्मिलित हैं।

डॉ० क्षमाशंकर जी जब भी किसी विषय पर लेखन करने के लिए तत्पर होते थे, मुझसे सम्पर्क करते थे और विषय-वस्तु से अवगत कराते थे। आवश्यकता यदि पड़ती थी तो मैं उसमें संशोधन कर, उनके विचार को ‘और मौलिक’ और गवेषणा-प्रधान रूप देने के लिए यथाशक्य सम्मति प्रकट करता था।
नवीनतम कृति-प्रकाशन होने पर वे घर आते थे और एक प्रति भेंट करते थे।

ऐसे सारस्वत मित्र के आकस्मिक निधन होने पर हमारा ‘मुक्त मीडिया’ उनकी स्मृतियों के प्रति अपनी भावांजलि अर्पित करता है।