गोवर्धनपूजा के पीछे हमारा उद्देश्य गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन

कछौना, हरदोई। भारतीय संस्कृति में गोवंश हमेशा से पूजनीय रहे हैं। गोवर्धनपूजा के पीछे हमारा उद्देश्य गोवंश का संरक्षण एवं संवर्धन का है। परंतु वर्तमान समय में छुट्टा गौवंशों की हालत दयनीय बनी है। गौवंश भूख, बीमारी व अन्य व्यवस्थाओं का शिकार होकर तड़प तड़प कर मरने को विवश है। सरकार के लाख प्रयास के बावजूद गोवंश संरक्षण की योजना अमलीजामा नहीं पहुंच पा रही है।

गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए खोले गए अस्थाई गोआश्रय स्थल अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ गए हैं। सूखा भूसा, दलदल का पानी, सड़क दुर्घटनाओं में सड़क दुर्घटनाओं में चुटहिल होकर मरना, रेलवे ट्रैक की चपेट में आने से घायल होकर मृत्यु, किसानों द्वारा खेतों में लगाए गए कटीले तारों की चपेट में आने से गए घायल होकर तड़प तड़प कर मरने को नियति बन गई है। वही ग्राम प्रधानों का कहना है गोवंश के रखरखाव, भूसा के लिए आने वाली धनराशि चार माह से नहीं आई है। लाखों रुपयों का कर्जा हो गया है। भूसा देने वाले पैकेट न मिलने के कारण भूलता देने को मना कर दिया है।

विकासखंड कछौना के लगभग नौ अस्थाई गौ आश्रय स्थलों का भूसा का भुगतान की धनराशि लगभग 28 लाख रुपए नहीं ग्राम प्रधानों को मिली है। ग्राम प्रधानों ने अस्थाई गौ आश्रय स्थलों के संचालन करने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। छुट्टा गौवंशों के कारण किसान व आम जनमानस प्रभावित हैं। किसानों की गाढ़ी कमाई छुट्टा गौवंशों के झुंड फसल चट कर जाते हैं। वहीं सड़क दुर्घटना में आम जनमानस चपेट में आने से घायल होने के साथ असमय मौत के घाट उतार जाते हैं। गौवंशों के संरक्षण का सपना आधा अधूरा ही दिखाई पड़ रहा है। जिसका खामियाजा बेजुबान पशुओं के साथ आम जनमानस को उठाना पड़ रहा है।

क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के संयोजक रामखेलावन कनौजिया ने बताया बिना प्रभावी कदम उठाए गए छुट्टा गौवंशों के संरक्षण एवं संवर्धन की बातें बेमानी है। डेयरी योजनाएं, गर्भधारण में केवल बछिया पैदा होना, गोमूत्र, गोबर खाद, अस्थाई गौशालाओं में खाली मैदान, चारागाह में अच्छा आउटपुट मिलने पर ही गौ संरक्षण हो पायेगा। गौवंश पलकों की अतिरिक्त आमदनी के साथ गौवंश संरक्षण होगा।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता