कहानी : रिश्तों का हिसाब
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सत्येंद्र रिटायर हो चुके थे। सेवानिवृत्ति का दिन उनके जीवन में किसी उत्सव की तरह नहीं आया था। न बैंड बजा, न घर के बाहर कोई बड़ा-सा स्वागत हुआ, न रिश्तेदारों […]
डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– सत्येंद्र रिटायर हो चुके थे। सेवानिवृत्ति का दिन उनके जीवन में किसी उत्सव की तरह नहीं आया था। न बैंड बजा, न घर के बाहर कोई बड़ा-सा स्वागत हुआ, न रिश्तेदारों […]