रामभक्ति देखिए, कुर्सी से अब सटने लगे!
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बातों-ही-बातों में, ‘आदर्श’ अब बँटने लगे, जनाब को देखिए, मुद्दों से अब हटने लगे! राम तो राजसिंहासन, त्याग कर आगे बढ़े, ग़ज़ब की रामभक्ति, कुर्सी से अब सटने लगे! आश्वासनबाबू की बाबूगिरी […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय– बातों-ही-बातों में, ‘आदर्श’ अब बँटने लगे, जनाब को देखिए, मुद्दों से अब हटने लगे! राम तो राजसिंहासन, त्याग कर आगे बढ़े, ग़ज़ब की रामभक्ति, कुर्सी से अब सटने लगे! आश्वासनबाबू की बाबूगिरी […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय बातों-ही-बातों में, ‘आदर्श’ अब बँटने लगे, जनाब को देखो, मुद्दों से, कैसे हैं हटने लगे! राम तो राजसिंहासन, त्याग कर आगे बढ़े, कैसे रामभक्त हैं, जो कुर्सी से सटने लगे! आश्वासन देते […]