कविता : बेटी की अहमियत
शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ) धन की लालसा मन में जगाते हो, बेटी को पराया धन बोल गर्भ में गिराते हो। कहते है ,के बेटा वंश बढायेगा, यदि बहू न आई आंगन तो किलकारी कौन गूंजायेगा। […]
शालू मिश्रा, नोहर (हनुमानगढ) धन की लालसा मन में जगाते हो, बेटी को पराया धन बोल गर्भ में गिराते हो। कहते है ,के बेटा वंश बढायेगा, यदि बहू न आई आंगन तो किलकारी कौन गूंजायेगा। […]