जीवन की राहें

December 12, 2025 0

राघवेन्द्र कुमार राघव– बड़े रंग हैं बड़े ढंग हैं,दुनिया के खेल निराले।कहाँ फँस गये इस विपदा मे,हम हैं भोले-भाले। बड़ी कठिन जीवन की राहें,हर ओर बिछे हैं काँटे।सभी मुसीबत बढ़ा रहे हैं,कोई न दुःख को […]

हिन्दी कविता– अस्तित्व

December 8, 2023 0

किसी के पासजब कुछ बचता नहीं।बुलाए तब कोईमैं इतना सस्ता नहीं। माना कि प्रेम चाहिएजीवन में।मगर मांगना पड़ेभीख की तरह,वो भी जँचता नहीं। माना कि जीवन मेंकुछ चीजेंहासिल नहीं हुई।फिर भीदेखकर औरों की तरक्कीमैं कभी […]