बहादुर हो तो सीना तानकर सामने से मिलो
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक : ठिठकते पाँवों को ज़मीं से बढ़ाते चलो, ठिठुरती अँगुलियों को हरकत में आने दो। दो : लपकते शोलों को छूकर मैं देखा करता हूँ, तुम मुझे अँगारों की तासीर क्या […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- एक : ठिठकते पाँवों को ज़मीं से बढ़ाते चलो, ठिठुरती अँगुलियों को हरकत में आने दो। दो : लपकते शोलों को छूकर मैं देखा करता हूँ, तुम मुझे अँगारों की तासीर क्या […]