याद पुरानी घातें आयीं
— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय चिन्दी-चिन्दी रातें पायीं,फाँकों में मुलाक़ातें पायीं।मुरझायीं पंखुरियाँ देखीं,कही-अनकही बातें पायीं।बेमुराद आँसू छलके जब,याद पुरानी घातें आयीं।दुलराते बूढ़े ज़ख़्मों को,यादों की रातें गहरायीं।शातिर की चालों में हमने,ठगा-ठगा रह मातें खायीं। (सर्वाधिकार […]