भारतीय परम्परा से प्राप्‍त ज्ञान पूरी तरह वैज्ञानिक

January 6, 2024 0

पूज्य “सद्गुरुदेव अवधेशानन्द सरस्वती” जी ने कहा– “वेदोऽखिलो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्।आचारश्चैव साधूनां आत्मनस्तुष्टिरेव च॥” वेद शब्द “विद्” धातु से बना है, जिसका आशय जानने अर्थात् ज्ञान प्राप्त करने से है। वेद ज्ञान-विज्ञान के अप्रतिम […]

वर्ण, गोत्र, जाति और वंश

January 2, 2023 0

युवा जरूर पढ़ें यह आर्टिकल व अपनी प्रतिक्रिया भी लिखें…!! प्रश्न–जाति क्या है…?What is the caste…?उत्तर–जन्मतः प्राप्त उपाधि ही जाति है। जो जिससे जन्म लेता है वह उसी जाति की उपाधि वाला होता है। जैसे- […]

चिन्तन की समय-सत्य कड़ी

May 20, 2021 0

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय मनसा-वाचा-कर्मणा परिशुद्ध मनुष्य को कोई पसन्द नहीं करता; क्योंकि वह प्रत्येक सत्य को ‘सत्य’ के साथ निर्लिप्त भाव के साथ कहता है; उसके कथन और कर्म में कोई भेद नहीं […]

जड़बद्ध आचरणजगत् का दर्शन

December 7, 2020 0

———0 चिन्तन के आयाम 0 ——- —- आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय यह विडम्बना ही है कि अद्वैतवादी सिद्धान्त और अभेदमूलक विचार की जन्मभूमि में ही आरम्भ से भेदमूलक समाज रहा है। यहाँ सिद्धान्त और व्यवहार […]

“सुरमई अँखियों में इक नन्हा-मुन्ना सपना दे जा रे!”

August 6, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय  अभिनय में वह शक्ति है, जो पाषाण को भी द्रवीभूत कर दे। ‘सदमा’ अर्थात् आघात मनुष्य को एक ऐसी मानसिक अवस्था में प्रवेश कराता है, जहाँ उसका जीवन किसी अभिनय से अल्पतर […]

नारी-शक्तीकरण : एक सम्पूर्ण जीवन-दर्शन

January 19, 2018 0

डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय (भाषाविद्-समीक्षक), इलाहाबाद- वस्तुत: परिवार, समाज, राज्य तथा राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में नारी-समुदाय की प्रमुख भूमिका रही है परन्तु इस लक्ष्य तक पहुँचने में उन्हें दीर्घकालीन ऐतिहासिक संघर्ष करना पड़ा है। वह […]

फ़ासिस्टों का कोई संतुलित राजनीतिक दर्शन ही नहीं था…

December 9, 2017 0

फासीवाद या फ़ासिस्टवाद (फ़ासिज़्म) इटली में बेनितो मुसोलिनी द्वारा संगठित “फ़ासिओ डि कंबैटिमेंटो” का राजनीतिक आंदोलन था जो मार्च, 1919 में प्रारंभ हुआ। इसकी प्रेरणा और नाम सिसिली के 19वीं शती के क्रांतिकारियों-“फासेज़”-से ग्रहण किए […]

धर्म और दर्शन

November 17, 2017 0

राघवेन्द्र कुमार ”राघव”- प्राचीन धर्म ग्रन्थ कहते है ” जो धारण करने योग्य हो ” वह धर्म है | लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में धर्म आडम्बर से ज्यादा कुछ नहीं | हम किसी भी धर्म की […]