नीति देश की मनचली, छिनरे हैं सब ओर
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गंगा में शव बह रहे, केवल दिखता रोष।शासक मद में चूर है, नहीं किसी को होश।।दो–क्रूर बहुत परिवेश है, साधन-सुविधा हीन।जनता ऐसी दिख रही, मानो कोई दीन।।तीन–हम अपने ही देश […]
★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक–गंगा में शव बह रहे, केवल दिखता रोष।शासक मद में चूर है, नहीं किसी को होश।।दो–क्रूर बहुत परिवेश है, साधन-सुविधा हीन।जनता ऐसी दिख रही, मानो कोई दीन।।तीन–हम अपने ही देश […]