ब्लॉक कोथावां में वोटर लिस्टों की बिक्री के नाम पर हो रही अवैध वसूली

नीति देश की मनचली, छिनरे हैं सब ओर

★ आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

एक–
गंगा में शव बह रहे, केवल दिखता रोष।
शासक मद में चूर है, नहीं किसी को होश।।
दो–
क्रूर बहुत परिवेश है, साधन-सुविधा हीन।
जनता ऐसी दिख रही, मानो कोई दीन।।
तीन–
हम अपने ही देश में, याचक का बन रूप।
निर्दय-निर्मम दिख रहा, लोलुप-शोषक भूप।।
चार–
क्रन्दन-सिसकी गूँजती, चहुँ दिशि हाहाकार।
निष्ठुर छप्पन इंच है, सिकुड़ा है आकार।।
पाँच–
नीति देश की मनचली, छिनरे हैं सब ओर।
दिन को कहते रात हैं, रात कहेंगे भोर।।

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ११ मई, २०२१ ईसवी।)

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