Poem : Together we stand, hand in hand

July 23, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav– Freedom came through sacrifice and pain.Courage of all Indians shall forever remain.The tricolour flies so proud high and high.A symbol of dignity that colours all the sky.With honesty for nation let […]

भूमि का भार उतारने को भूमिजा का प्रण

July 11, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– चित्रकूट पीछे छूट चुका था। अब वन का स्वरूप बदल रहा था। यहाँ वृक्ष अधिक विशाल थे। उनकी जटाएँ मानो धरती को आलिंगन करती थीं। लताएँ शताब्दियों पुराने वृक्षों से इस […]

रातों की सूनी चौखट पर, तेरा नाम पुकारा मैंने

April 26, 2026 0

डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव– वादा करके मैं मुकरा,अब जीना भारी लगता है।कैसे आँख मिलाऊँ मैं,जीना गद्दारी लगता है।तुम मानो या ना मानो ये,तुम बिन जीना मुश्किल है।साँसें भी कोस रही हमको,लगता पहाड़ सा पल-पल है।मन […]

The Nature of Love

January 18, 2026 0

Dr. Raghavendra Kumar Raghav— The human body is composed of the five great elements—earth, water, air, fire, and ether. In the Indian philosophical tradition, these five are not merely components of the body; they are […]

An eternal Sacrificer Bhagat Singh

September 28, 2023 0

Raghavendra Kumar ‘Raghav’— Speaking the truth, courage immense, Fighting for justice, resilience. For two months, hunger and thirst withstood, Courage to give his life, grand, good. Apart from those who begged for rights, Isolated from […]

सरस्वती-वन्दना

May 16, 2022 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी ‘राघव’- ओ! वीणापाणि मा, ओ! पुस्तक धारिणि मा। ओ! ज्ञान दायिनी मा, ओ! हंसवाहिनी मा। कर तम का संहार, ज्ञान की ज्योति देती मा। ओ! वीणापाणि मा, ओ! पुस्तक धारिणि मा॥ विद्या की […]

अपसंस्कृति है कट्टरवादी-वहाबी आतंकवाद

August 14, 2021 0

राघवेन्द्र कुमार त्रिपाठी “राघव”- जब अकर्मण्यता को छिपाकर जीवन जीने के लिए आवश्यक संसाधनों को सच्चाई और पुरुषार्थ से जुटाने की बजाय हिंसा से छीन लिया जाता हैए चोरी कही जाती है । इससे चोर […]

कविता : दहेज दानव

November 30, 2019 0

कब तक अपनी बहू बेटियाँ चढ़ती रहेंगी बलिवेदी पर । इस दहेज दानव के मुख का कब तक रहें निवाला बनकर ? कब तक इनके पैरों में जकड़ी रहेंगी बेड़ियाँ ? कब तक हम सब […]

धर्म और दर्शन

November 17, 2017 0

राघवेन्द्र कुमार ”राघव”- प्राचीन धर्म ग्रन्थ कहते है ” जो धारण करने योग्य हो ” वह धर्म है | लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य में धर्म आडम्बर से ज्यादा कुछ नहीं | हम किसी भी धर्म की […]