संविधान है कह रहा, लाओ! घर में सौत
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति। मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू भयी शक्ति।। दो : पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर। भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब […]
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय एक : कैसा यह भगवान् है, चोर-चमारी भक्ति। मन्दिर में मूरत दिखे, उड़न-छू भयी शक्ति।। दो : पट्टी बाँधे आँख में, देश जगाता चोर। भक्त माल सब ले गये, कहीं नहीं अब […]