तलाश….. November 23, 2017 0 डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय- मेरे दोस्त! मुझे तलाश है तुम्हारे मेरा न होकर भी कुछ होने का | हर तलाश मुझे झुठला देती है; स्वाभिमान को गिरवी रख गले में विवशता की घण्टी लटका बहलाती रहती […]