जीवन की राहें
राघवेन्द्र कुमार राघव– बड़े रंग हैं बड़े ढंग हैं,दुनिया के खेल निराले।कहाँ फँस गये इस विपदा मे,हम हैं भोले-भाले। बड़ी कठिन जीवन की राहें,हर ओर बिछे हैं काँटे।सभी मुसीबत बढ़ा रहे हैं,कोई न दुःख को […]
राघवेन्द्र कुमार राघव– बड़े रंग हैं बड़े ढंग हैं,दुनिया के खेल निराले।कहाँ फँस गये इस विपदा मे,हम हैं भोले-भाले। बड़ी कठिन जीवन की राहें,हर ओर बिछे हैं काँटे।सभी मुसीबत बढ़ा रहे हैं,कोई न दुःख को […]
आदित्य त्रिपाठी, सहायक अध्यापक बे०शि०प० भला कब कौन समझा है! भला कब कौन समझेगा! हृदय की वेदना तेरे सिवा अब कौन समझेगा? मैं तुझको आजमा लेता मगर क्या आजमाऊँगा, तुम्हारे प्यार से दीपित दिये दिल […]
मनीष कुमार शुक्ल ‘मन’ (लखनऊ) सज़ाएं काट लूँगा मैं तुम्हारा नाम न लूँगा | कभी भी अब ज़माने में प्यार से काम न लूँगा || मुहब्बत में असर होता तो ये हालात न होते | […]