आज आप सब लोगों के साथ में एक घटना का ज़िक्र करने जा रहा हूँ, जिसका मेरे मन के अन्तर्पटल पर अब तक प्रभाव है। पांच महीने पहले हुई घटना बताने जा रहा हूँ, जो मेरे सामने हुई। ध्यान से पढ़ना आप सब इंसान हैं, भावों को समझते हैं । …..
एक मेरा दोस्त था। उसका कई लड़कियों और महिलाओं से सम्बन्ध है और रह चुका है। उसके पड़ोस में एक लड़की रहती थी, जिसको एक दूसरा लड़का चाहता था दिल से , पूरे मन से उसका होना चाहता था। उसका किसी और लड़की से कोई सम्बन्ध नहीं है ये बात मुझे सही से पता है क्योंकि वो भी मेरा दोस्त है। उसने प्यार का इज़हार किया उस लड़की से, अपने दिल की बात कही उस लड़की से, लड़की ने मना कर दिया, लड़का फिर चला गया उदास होकर और फिर कभी लौट कर नहीं आया । न तो उसके पास कुछ भी कहने के लिए था और शायद फिर से ज़लील व बदनाम होने की हिम्मत भी उसमें नहीं बची थी। अब लड़की ने मेरे दोस्त के पास फोन से उस लड़के के बारे में बताया कि उस लड़के ने मुझसे प्यार का इजहार किया है, तो मेरे दोस्त ने हँस कर मजाक के लहजे में कहा मान जाओ! जबकि मेरा दोस्त खुद उसके फ़िराक़ में था, उसे फंसाना चाहता था उसके व उसकी भावनाओं के साथ खेलना चाहता था । पर उसके दिल में उस लड़की के लिए प्यार नहीं था और लड़की उसको चाहती थी सच्चे मन से, पर वो लड़की अभी तक ये बात मेरे दोस्त से बता नहीं पाई थी कि वो उसको प्यार करती है। मेरे दोस्त के ये कहने पर की मान जाओ, इस पर उस लड़की ने कहा नहीं ! वो मुझे पसंद नहीं । वो लड़का बिलकुल बकवास है और इतना कहने के बाद उस लड़के के इज़हार करने के तरीके पर और उसके बारे में बात करके उस पर लगातार जोर-जोर हँस रही थी । उसका दोनों ने मिलकर काफी देर तक मज़ाक उड़ाया। मेरे दोस्त ने कुछ नहीं कहा और ना ही उसको कुछ और ही समझाया । क्योंकि दोस्त खुद उसको अपने जाल में फांसना चाहता था। कुछ दिनों के बाद लड़की मेरे उस दोस्त के घर आई जो कि बहुत बड़ा फ़रेबी है झूठा है। लड़की उसके लिए एक महंगा उपहार लायी थी
ये उपहार बिलकुल वैसा था, जैसा कि आज कल प्रेमी प्रमिकाओं के बीच चलन में दिए जाते हैं । मेरे दोस्त के हाथों में उस उपहार को रखा और फिर अपने तरीके से अपने प्यार का इज़हार किया।
मेरा दोस्त बहुत खुश था, क्योंकि बिना कुछ किये उसको वो मिल रहा था, जिससे वो धोखा करना चाह रहा था। फ़िर दोनों के बीच वही हुआ जिसे आजकल लोग प्यार का नाम देते हैं। लड़की को आज तक पता नहीं लगा कि उसके साथ धोखा हुआ है और शायद आगे भी होता रहेगा…
वो लड़की आये दिन छली जायेगी क्योंकि उसके रिश्ते की बुनियाद ही खोखली है, जो कि स्वार्थ पर रखी गई है और ये स्वार्थ दोनों तरफ से है। मेरा नालायक दोस्त… जो कभी मेरा दोस्त था, खुशी से रह रहा है। मैं कुछ नहीं कर सका, बस रास्ते की तरह देखता रह गया। उसको और भी दूसरे लोग भी मिल रहे हैं… इस लड़की की तरह वफ़ा की उम्मीद करने वाले… बदले में उन्हें क्या मिलेगा? ये हम भी जानते हैं, औऱ.. शायद आप भी। हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते, मज़बूर हैं हम । क्योंकि बताते हैं तो दोस्त हमसे दोस्ती ख़त्म कर देगा, अगर दोस्ती की परवाह नहीं करें तब भी कोई फायदा नहीं क्योंकि लड़की मेरी बातों का यकीन नहीं करेगी, हो सकता है वो हमें अपराधी साबित करने की फिराक में लग जाये या अभद्रता से हमसे बात करने लगे। इसलिए अब सोचते हैं कि शायद यही उस की नियति है, यही उसका भाग्य है………………….
अब आप सोचो क्या उस लड़की का निर्णय सही था?
या वो लड़का इतना बुरा था, जिसको उसने मना कर दिया? या इस लड़की ने उस लड़के को इसलिए मना किया कि उसके पास धन दौलत नहीं थी? या उस मेरे दोस्त को इसलिए पसंद किया कि वो उस लड़के से ज्यादा सुन्दर है… ज्यादा धनवान है? और ये घटना कोई अकेली घटना नहीं है इस तरीके की हज़ारो घटनायें हमारे समाज में हो रही हैं जिसके शायद हम खुद ही ज़िम्मेवार हैं?
….अब आप ही सोचिये कि आजकल की लड़कियां लड़को में क्या पसंद करती हैं? उनकी ये पसंद नापसंद किस हद तक उनके स्वर्णिम भविष्य और सामाजिक, पारिवारिक एवं व्यक्तिगत रिश्तों के लिए दुखदायी है?