हे! मातृशक्ति है नमन तुम्हें

 जगन्नाथ शुक्ल, इलाहाबाद (उ०प्र०)

हे! मातृशक्ति है नमन तुम्हें,

ये मेरा जीवन है दान तुम्हारा।
है शत् शत् वन्दन मातु तुम्हें,
स्नेह,कान्ति और मान तुम्हारा।
हे!सहनशक्ति की प्रतिमूर्ति मातु,
अद्भुत शक्ति सम्मान हमारा।
जीवनदर्शन की सञ्चित निधि,
ममता का प्रतिमान सहारा।
निश्छल भावना और प्राण मात्र
भाव विह्वल और उत्थान हमारा।
निर्मल, निर्विघ्न नित नेह युक्त,
तुम ही हो अनुपम खान हमारा।
तुम उष्णरश्मि में चन्दन हो ,
हर रूप में हो तुम शान हमारा।