लक्ष्मण जी (रा. स्व. सं.)-
शिव मंदिर परिसर, महानगर, लखनऊ में आज संस्कृत भारती के तत्वावधान में जनपद संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संस्कृत भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री मा. दिनेश कामत तथा समापन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल मा. राम नाईक तथा संस्कृत भारती के राष्ट्रीय महामंत्री मा. श्रीश देवपुजारी ने आये हुए संस्कृतानुरागी के बीच अपने विचार रखे।
संस्कृतभारती के अ.भा. महामन्त्री श्रीश देवपुजारी ने कहा कि संस्कृत भारत की आत्मा है । भारत की रक्षा याने आत्मा की रक्षा है । मानव संसाधन का विकास संस्कृत के माध्यम से होगा । संस्कृतभारती के अ.भा. संगठन मन्त्री दिनेश कामत ने कहा कि संस्कृत वैज्ञानिकी भाषा है । ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनय पाठक ने कहा कि नयी तकनीकि के द्वारा संस्कृत पढ़ाने की व्यवस्था की जानी चाहिए ।
संस्कृत को राजभाषा के रूप में स्थापित किया जाये इस मांग को लेकर सभा में आये सभी नागरिकों ने एक फलक पर हस्ताक्षर किये। आधुनिक चलचित्र गीत का संस्कृत में अनुवाद कर नृत्य के साथ उसकी प्रस्तुति की गयी। इससे यह सूचित किया गया कि संस्कृत आधुनिक भाषा भी है। एक संस्कृत कुटुम्ब को मंच पर दर्शाते हुए यह सूचित किया गया कि सरल संस्कृत में पारिवारिक कार्य सम्पन्न किये जा सकते हैं। वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण यह विषय लेकर संस्कृत में एक नाटिका का मंचन किया गया। विशिष्ट अभ्यागत के रूप में पद्मश्री डॉ. सब्यसाची सरकार का संस्कृत में उद्बोधन हुआ।
संस्कृत वस्तुप्रदर्शन, कार्यप्रदर्शन, विज्ञानप्रदर्शन और सब्जी की संस्कृत दुकान यह सम्मेलन के और विशेष थे। माननीय राज्यपाल जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि भारत का समझना है तो संस्कृत को आधार बनाना होगा। उन्होंने कहा कि यदि मुझे ज्यादा समय मिला होता तो मैं भी अपना भाषण संस्कृत में लिखकर लाता। सैकड़ों वर्षों से संस्कृत-भाषा अन्य भाषाओं की बड़ी बहन के समान रही है। संस्कृत के प्रति लोगों में व्याप्त भ्रम को भी समाप्त किया जा सकता है। भारत की आजादी के बाद से अब तक यदि आपको कम शब्दों में पूरे वाक्य को समझना है तो संस्कृत के दो-तीन शब्दों के प्रयोग से ही पूरा वाक्य समझा जा सकता है जैसे वसुधैव कुटुम्कम्, योगक्षेमं वहाम्यहं, यतो धर्म ततो जयः आदि। संस्कृत के शब्दों में कितनी शक्ति है यह कुछ संस्कृत के शब्दों जैसे सत्यमेव जयते जैसे बोधवाक्य से लगाया जा सकता है जोकि धर्म और न्याय के क्षेत्रों से जुड़ा है। लोकसभा के अध्यक्ष के कुर्सी के ऊपर धर्म चक्र प्रवर्तनाय लिखा है। संस्कृत में सब्जी बेचने वालों को देखकर बहुत आनन्द हुआ। दैनिक उपयोगी वस्तुओं का संस्कृत नाम देखकर प्रसन्नता हुई। अन्त में कहा संस्कृतभारती को कार्यक्रम में बुलाने के लिए धन्यवाद दिया एवं पुनः कार्यक्रम में बुलाने के लिए आग्रह भी किया।