तुम्हारे पास कमी है
वक्त की
और मै खुद मे ही
बहुत व्यस्त हूँ।
हमारे रास्ते
कभी एक नहीं
तुम अपने मे
और मैं
अपने मे मस्त हूँ।
जानिबे मंज़िल जाते
कभी टकरा गये
तो बात होगी
मगर वक्त नहीं।
वक्त था जब
तब भी तो अलग थे
अब ज़िन्दगी की
जद्दोजहद से पस्त हूँ।
–डॉ० राघवेन्द्र कुमार राघव