सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि सर्वेश अस्थाना को काका देवेश स्मृति सम्मान से किया गया सम्मानित

अंकित सक्सेना बदायूँ-

बिल्सी में स्व. काका देवेश की स्मृति में कवि सम्मेलन में श्रोताओं को कवियों ने अपनी कविताओं की बारिश से भिगोया ।

बिल्सी के प्रसिद्ध हास्य व्यंग कवि रहे स्व. काका देवेश की स्मृति में श्री सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम द्वारा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें श्रोताओ रात भर कविताओं का रसास्वादन किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर एवं पुष्प अर्पित कर किया गया। इस अवसर अंतराष्ट्रीय हास्य व्यंग कवि सर्वेश अस्थाना को स्व. काकादेवेश स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। महंत मटरुमल शर्मा द्वारा स्व. काका देवेश की धर्मपत्नी एवं समस्त कवियों को पट्का व माला पहनाकर व श्री बालाजी की मूर्ति भेंट कर सम्मान किया। तदनुपरान्त आगरा से आयीं डॉ. रुचि चतुर्वेदी द्वारा सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की गई। स्व. काका देवेश के पुत्र आशीष वशिष्ठ ने पिता की कवितायें सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया।

वाणी पाठक ने कहा, कथाओं का संचालन करने वाले दिव्य रूप, सादगी से भरे मन्त्र मुग्ध गीत गा गए। ममताऐं सारी स्नेह भाव में उछाल कर, अद्भुत अनुरागप्रेम में पगा गए। प्राचीन भारतीय संस्कृति ही प्रधान, मृदुल स्वभाव लिए भव्य प्रीत पा गए। कर्म योग गीता वाला पाञ्चजन्य उद्घोष, शङ्खनाद कर ब्रम्हलोक में समा गए।

आयोजन में अंतराष्ट्रीय हास्य व्यंग्य कवि सर्वेश अस्थाना ने अपनी पंक्तियों से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया उन्होंने कहा, किसी नेता की गिरगिट से तुलना करना महापाप है, क्यों रंग बदलने के मामले में नेता गिरगिट का बाप है। अम्बेडकर नगर के युवा ओज कवि अभय सिंह निर्भीक ने अपनी ओजपूर्ण वाणी में कहा, भारत माता का हरगिज सम्मान नहीं खोने देंगे, अपने पूज्य तिरंगे का अपमान नहीं होने देंगे। आगरा की कवियत्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने कहा, लाल महावर लगे मेरे इन पांव की चिन्ता मत करना, सीमा पर जागे रहना तुम गांव की चिन्ता मत करना। ठिठुरन हो या कड़ी धूप हो छांव की चिन्ता मत करना, लगे युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिन्ता मत करना। लगे युद्ध में चोट अगर तो घाव की चिन्ता मत करना।। कवि सम्मेलन के संयोजक एवं युवा कवि डॉ. अक्षत उर्मिलेश ने ओजपूर्ण वाणी में काव्य पाठ करते हुये कहा, तुम्हे टूटे सूत्र फिर जोड़ने होंगे, देखो इस ल्क्ष्य का विराम नहीं आपका ही नाम बदनाम नहीं होग, एकता का जारी अभियान रखना, वोटरों की ताकत का ध्यान रखना। बिल्सी के वरिश्ठ कवि नरेन्द्र गरल ने कहा, अधरों पर हास्य लिये तुमन हर कविता को मृद हास दिया, हर सहन करके तुमन हर बार सुगंधित वास दिया। बदायूँ के ओज कवि कुलदीप अंगार ने कहा, अलगाववादियों के पर कतरे धन्य धन्य हैं मोदी जी, भारत के नेताओं में सबसे अनन्य हैं मोदी जी। मुरादाबाद ने पधारे हास्य कवि षरीफ भारती ने कहा, नजरें झुका के जालिम चलती थी इस अदा से, जुल्फों में उसकी एक दिन मैं रह गया उलझ के, लड़की वो निकली भैया एक खास आदमी की, झााडू से मुझको मारा आम आदमी समझ के। बिल्सी की युवा कवियत्री मुक्ति आनंन्द ने भी कविता पढ़ी। कार्यक्रम का संचालन सर्वेश अस्थाना ने किया। देर रात्रि चले कवि सम्मेलन कार्यक्रम में अध्यक्षता स्वामी रामचन्द्राचार्य जी ने की। इस अवसर पर सिद्धपीठ बालाजी धाम के महंत मटरुमल शर्मा, प्रदीप शर्मा, संजीव शर्मा, राजीव शर्मा, सुधीर माहेष्वरी, चारु सोमानी, राजेश माहेष्वरी, स्वतंत्र राही, संजीव माहेष्वरी, दीपक बाबा, रोहित माहेष्वरी, सुवीन माहेष्वरी, विषाल भारत माहेष्वरी, संजीव तिवारी, अनूप माहेष्वरी, प्रिन्स राठी, समीर राठी, कपिल, डिम्पल, रिंकू भगत, सौरभ माहेष्वरी, श्रीकान्त मिश्रा, संदीप मिश्रा, आषीश माहेष्वरी, मोहित देवल, मुनीश गिरि, गिरीश गिरी आदि उपस्थित रहे।