-डॉ. राजेश कुमार शर्मा ‘पुरोहित’
कवि/साहित्यकार

सन्त काव्यधारा के प्रमुख कवि कबीरदास जी महान समाज सुधारक थे। हिंदी साहित्य में बड़े सम्मान के साथ कबीर को याद किया जाता है। कबीर के दोहे बच्चों की किताबों में है। हिंदी के शिक्षक विद्यालयों में उन दोहों के अर्थ बच्चों को पढ़ाते हैं। उन्होंने समाज मे व्याप्त अंधविश्वास व रूढ़ियों को मिटाने का अथक प्रयास किया। वे यथार्थ लिखते व यथार्थ ही बोलते थे। कबीर की उलटवासी वाणी सब के समझ मे नहीं आती। उनका बढ़ा गूढ़ रहस्य होता है। कबीर ने सधुक्कड़ी भाषा मे अपनी बात कही।उन्होंने धर्म का सम्बंध धर्म से जोड़कर रूढ़िवादी परम्परा का खंडन किया।उन्होंने किसी को ऊंचा नीचा नहीं बताया उन्होंने कहा सिर्फ मनुष्य एक जाति है। सबका धर्म एक है सत्य। सत्य ही परमात्मा है। हमें उस सत्य की खोज करना है। ईश्वर सबके घट में रहता है उसे खोजने के लिए मन्दिर मस्जिद काशी काबा में लोग खोजते हैं। लेकिन वो तो तुम्हारे सबके भीतर बैठा है। वह माया क्रोध मोह आदि विकारों के मन पर पड़े परदों के कारण दिखाई नहीं देता। जीव माया के वशीभूत हो भटकता ही रहता है। उन्होंने समाज मे फैली कई कुरीतियों,बुराइयों को समाप्त करने का काम किया।
कबीर का जन्म 1398 में हुआ था।ये जाति से जुलाहा थे। काशी में रहते थे।लोई से इनका विवाह हुआ।कमाल इनका पुत्र व कमाली पुत्री थी।ये सिकन्दर लोधी के समकालीन माने जाते हैं।कबीर अनपढ़ थे। मसि कागद छुयो नहीं,कलम गह्यो नहीं हाथ। जिन्होंने कलम को छुआ तक नहीं। कलम दवात से कोई काम नहीं रखा। लेकिन कबीर जैसा दूसरा कोई नहीं। वे अध्यात्म धर्म व दर्शन के ज्ञाता थे। दार्शनिक थे कबीर।कबीर कवि समाज सुधारक पथ प्रदर्शक महात्मा महापुरुष कहे जाते हैं। कबीर का बीजक पढ़ते ही रहो आनंद आता है। कबीर सभी मनुष्यों को ईश्वर की संतान मानते थे।हिन्दू मुस्लिम भाइयों को एकता के सूत्र में बांधने का कार्य कबीर ने ही किया। निर्गुण भक्ति धारा के कवि थे।कबीर के दोहे भजन साखियाँ आज भी लोग पढ़ रहे हैं। उनकी कालजयी कृतियाँ युगों युगों तक पढ़ते रहेंगे। उन्होंने कहा भगवान कण कण में रहता है फिर भी हम तीर्थों में भगवान खोजते हैं।कबीर ने मांसाहार त्याग करने की बात कही।
कबीर जाति व्यवस्था वर्ण व्यवस्था में सुधार करना चाहते थे। जाति पांति के भेदभाव को मिटाना चाहते थे।उन्होंने सत्य का ज्ञान सद्चरित्र की बात कही।कबीर कहते है कि माला फेरने तिलक लगाने से काम नहीं चलेगा मन का मेल साफ करो। निर्मल मन मे ही श्री राम का निवास है।समाज मे खभी भी किसी से दोस्ती और न ही दुश्मनी करना चाहिए।
कबीर ने अमीर गरीब की खाई को पाटने के लिए काम किया। निर्बल को न सताइये कभी भी निर्बल को परेशान नहीं करना चाहिए।
कबीर के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है।
-श्रीराम कॉलोनी, भवानीमंडी
जिला झालावाड, राजस्थान