जिन्दगी का सामना

है कठिन पथरीली डगर तो क्या?
है सामने उलझा भँवर तो क्या?
इन कंटकों का सामना डटकर करेंगे।
जिंदगी का सामना हँसकर करेंगे।

हैं ख्वाब कुछ छूटे अधूरे से,
भय के हैं बादल भी घनेरे से,
इन बादलों को भेदकर आगे बढ़ेंगे,
जिंदगी का सामना हंसकर करेंगे।

धड़कनें रुकी-रुकी सी लग रहीं।
सांसें भी थमी-थमी सी जा रहीं।
मौत की आहट भी अब तो आ रही।
प्रण यही कि मौत से लड़कर रहेंगे।
जिंदगी का सामना हँसकर करेंगे।।

  ✍️अनुश्री