अपने इतिहास के सबसे ख़तरनाक मोड़ से गुज़र रही, देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश-परीक्षा!

आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

जब हम अतीत मे परीक्षाओँ के प्रश्नपत्र-घोटालोँ की तस्वीर देखते हैँ तब पाते हैँ कि हमारी छात्र-छात्राओँ के भविष्य के साथ खेलवाड़ कर, उनकी मानसिक शान्ति का अपहरण करनेवाले दरिन्दे कारागार के सीखचोँ के अन्दर पहुँचाये ही नहीँ जाते वा चार-छ: माह के भीतर ज़मानत पा जाते हैँ वा फिर ले-देकर आज़ाद हो जाते हैँ। यही कारण है कि देश मे जाने कितने परीक्षा-घोटाले किये जा रहे हैँ और घोटाले करनेवालोँ को कोई भय तक नहीँ। यदि क़ानून का ईमानदारी से पालन कराया जाता तो ‘ परीक्षा-प्रश्नपत्र-पापी’ वैसा कृत्य करने का विचार तक नहीँ ला पाते।

इन दिनो जिस तरह से नीट– २०२६ का प्रश्नपत्र परीक्षा होने के कई दिनो पहले ही प्रश्नपत्र लीक करा लिया गया था और उसके तार हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तराखण्ड, बिहार, झारखण्ड, दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र), केरल, जम्मू-कश्मीर इत्यादिक राज्योँ से जुड़ते देखे जा रहे हैँ। सी० बी० आइ० ने विषय की गम्भीरता को समझते हुए अपनी जाँच का दाइरा बढ़ा दिया है।

 वास्तविकता है कि भारतीय जनता पार्टी के सत्ता-संरक्षण मे नीट कराये जाने से पूर्व ही जिस तरह से कई वर्ष से प्रश्नपत्र-लीक कराने का खेल खेला जा रहा है, उससे प्रतिवर्ष देश की २५ से ३० लाख छात्र-छात्राओँ के भविष्य पर ग्रहण लग चुका है। भाजपाई सरगनाओँ पर केवल प्रश्नपत्र के ख़रीद-फ़रोख़्त का आरोप नहीँ है, बल्कि उससे अपने परिवार के बेटे-बेटियोँ को मेडिकल कॉलेजोँ मे दाख़िला दिलाकर ग़ैर-क़ानूनी डॉक्टर बनवाने का भी है। इससे इन्कार नहीँ किया जा सकता कि यह भाजपाइयोँ की संघटित प्रश्नपत्र लीक करने का कटु सत्य है, जिसके आधार पर उन सबने अपने परिवार के बच्चे-बच्चियोँ का भविष्य बनाया है और करोड़ोँ रुपये का धन्धा करके भाजपाई नेताओँ की तिज़ोरी भरकर हमारे होनहार युवाओँ के सपनो के साथ अक्षम्य छल किया है। अभी तक सी० बी० आइ० ने अँगुलियोँ के पोरोँ पर गिने जानेवाले कुछ दरिन्दोँ की गिरफ़्तारी की है, उसमे उनके परिवार के बच्चोँ के नाम आये हैँ, जिन्हेँ ग़लत तरीक़े से मेडिकल कॉलेज आवण्टित कराये गये हैँ। सी० बी० आइ० को इन विन्दुओँ पर पारदर्शी तरीक़े से जाँच करनी चाहिए। प्रश्नपत्र-लीक कराने मे हाथ बटानेवाला भाजपाई  'बिवाल-परिवार' बेहद शातिर रहा है, जिसे लगातार सत्ता-संरक्षण प्राप्त होता आ रहा है, वरना वह आजीवन कारावास का दण्ड भोग रहा होता। उस परिवार का मुख्य आरोपित भाजपाई माँगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल हैँ; घनश्याम बिवाल मर चुका है। जयपुर (राजस्थान) के जमवारामगढ़ मे रहनेवाला बिवाल-परिवार ने एक और परीक्षा-घोटाला कर दिया है। जिस छात्र ऋषि बिवाल के लिए कथित तौर पर नीट-प्रश्नपत्र ख़रीदने की जानकारी सी० बी० आइ० को मिली है, उसकी शैक्षणिक विवरण को लेकर ऐसा खुलासा हुआ है, जोकि चौँकानेवाला है। दिनेश विबाल का बेटा ऋषि विबाल की बारहवीँ योग्यता ही संदेह के घेरे मे आ चुकी है। जब ऋषि की बारहवीँ की अंकतालिका निकलवायी गयी है तब ज्ञात हुआ है कि उसने बारहवीँ परीक्षा द्वितीय श्रेणी मे उत्तीर्ण की थी। उसे थ्योरी-परीक्षा मे कुल ५६ अंकोँ मे से भौतिकविज्ञान मे ९, रसायनविज्ञान मे १५ और जीवविज्ञान मे मात्र २० अंक दिये गये थे। वह कृपांक के सहारे अपनी परीक्षा उत्तीर्ण कर पाया था। इससे ज़ाहिर हो गया कि यदि प्रश्नपत्र-लीक की घटना नहीँ होती तो यही 'सड़ियल' विद्यार्थी किसी शासकीय मेडिकल कॉलेज मे दाख़िला पा जाता और कितना अनर्थ हो जाता। ऋषि बिवाल फ़िलहाल सी० बी० आइ० की पकड़ से बाहर है।

सी० बी० आइ०-जाँच से कई ऐसे तथ्य उभरे हैँ, जिनमे भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े नेताओँ के चेहरे काले पड़ते दिख रहे हैँ। अब गम्भीर प्रश्न है– क्या जाँच की आग की लपटेँ उन शातिरोँ तक पहुँचेगी वा फिर शीर्ष नेतृत्व के दबाववश जाँच की सुई वहीँ पर अटक जायेगी?

सी० बी० आइ० ने किया एक बड़े सिण्डिकेट का पर्दाफ़ाश!

 जैसे ही नीट-घोटाले का प्रकरण सी० बी० आइ० को सौँपा गया था वैसे ही उसकी सक्रियता दिखने लगी; क्योँकि उसने एक-के-बाद-एक आरोपितोँ पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था, जिसमे प्रो० मनीषा गुरनाथ मंढारे, पी० ह्वी० कुलकर्णी, मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखण्डे, शुभम खैरनार, माँगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और शिवराज रघुनाथ मोटेगाँवकर गिरिफ़्तार किये जा चुके हैँ। उन सबका साम्राज्य महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान और हरियाणा तक फैला हुआ था। जाँच से खुलासा हुआ है कि नीट-प्रश्नपत्र ₹१० लाख से ₹१५ लाख तक मे बेचे गये थे। 

 अब हम इन विश्वासघातियोँ का चरित्र-चित्रण करना चाहेँगे।

प्रो० मनीषा गुरनाथ मंढारे : प्रो० मनीषा गुरनाथ मंढारे पुणे (महाराष्ट्र) मे वनस्पतिविज्ञान की प्राध्यापक है, जोकि बेहद शातिर और निकृष्ट महिला है। उसे सी० बी० आइ० ने मथुरा (उत्तरप्रदेश) के एक होटल से गिरिफ़्तार किया गया था। प्रो० मनीषा गुरनाथ वही अध्यापिका है, जिसे एन० टी० ए० की ओर से नीट– २०२६ के प्रश्नपत्रोँ को क्षेत्रीय भाषा मे अनुवाद करने के लिए विशेषज्ञ-समिति मे रखा गया था। उसे वनस्पतिविज्ञान के साथ प्राणिविज्ञान के अन्तिम प्रश्नपत्र का पूरा अधिकार सौँप दिया गया था; परन्तु उस लोभी और दरिन्दी अध्यापिका ने देश के भविष्य का सौदा करते हुए, एन० टी० ए० के साथ विश्वासघात कर दिया था।

पी० ह्वी० कुलकर्णी : यह व्यक्ति लातूर (महाराष्ट्र) का रहनेवाला है, जो दयानन्द कॉलेज मे रसायनविज्ञान का प्रवक्ता था। अब वह सेवानिवृत्त हो चुका है। वह अपने घर मे छात्र-छात्राओँ को पढ़ाने का भी काम करता है। कुलकर्णी भी एन० टी० ए० की परीक्षा-प्रक्रिया मे शामिल था, जिसके कारण उसकी पहुँच सीधे प्रश्नपत्रोँ तक थी। यही कारण है कि प्रो० मनीषा गुरदास मंढारे ने प्रश्नपत्र को लीक करने के बाद पी० ह्वी० कुलकर्णी से सम्पर्क किया था। कुलकर्णी ने अप्रैल, २०२६ ई० के अन्तिम सप्ताह मे पुणे-स्थित अपने घर मे उन छात्र-छात्राओँ को बुलाया था, जो प्रश्नपत्र के बदले मोटी धनराशि देने मे समर्थ थे। उन छात्र-छात्राओँ के पहुँचने पर कुलकर्णी ने प्रो० मनीषा-द्वारा उपलब्ध कराये गये रसायनविज्ञान और जीवविज्ञान के सारे प्रश्न और उनके सही उत्तर-विकल्प उन छात्र-छात्राओँ को लिखवाये और रटवाये थे; बदले मे लाखोँ रुपयोँ की वसूली की गयी थी।

मनीषा संजय वाघमारे : सी० बी० आइ० ने मनीषा को १४ मई, २०२६ ई० को गिरिफ़्तार कर चुकी थी। पुणे की सुखसागर नगर मे एक ‘ब्यूटी पॉर्लर’ की दुकान है। मनीषा नीट– २०२४ मे अपनी बेटी को नीट की पात्रता अर्जित कराने के लिए नीट-प्रश्नपत्र ख़रीदने के लिए सिण्डिकेट के जाल मे फँस चुकी थी, जिसमे उसके लाखोँ रुपये बरबाद हो चुके थे। आगे चलकर ब्यूटिशियन मनीषा उस बदनाम सिण्डिकेट का एक हिस्सा बन गयी थी। उसने अपने ब्यूटी पॉर्लर के ग्राहकोँ और सामाजिक दाइरे का इस्तेमाल करके ऐसे मातापिता और अभिभावकोँ को ढूँढ़ निकाले थे, जो प्रतिछात्र-छात्रा ₹१० लाख देने के लिए तैयार थे और दिये भी। मनीषा का लालच बढ़ता रहा और वह अपनी धनराशि मे और-और वृद्धि करने के लिए अपने एक पहले के परिचित और आयुर्वेद-चिकित्सक धनंजय लोखण्डे को जोड़ लिया।

शुभम खैरनार : ३० वर्षीय शुभम खैरनार नासिक (महाराष्ट्र) के इन्दिरानगर का रहनेवाला है, जो ‘बैचलर ऑव़ आयुर्वेदिक मेडिसिन ऐण्ड सर्जरी’ का छात्र है। शुभम नीट-प्रश्नपत्र लीक करानेवाले मुख्य आरोपितोँ मे से एक है। उसपर आरोप है कि उसने प्रश्नपत्र बेचनेवाले यश यादव से सम्पर्क कर कहा था कि २९ अप्रैल तक उसे प्रश्नपत्र मिल जाना चाहिए। उसने यश यादव से ₹१० लाख मे नीट का लीक हुआ प्रश्नपत्र ख़रीदा था। शुभम ने प्रश्नपत्र हाथोँ मे आते ही अपना एक गैँग बनाया, जो मेडिकल-प्रवेश-परीक्षा देनेवाले विद्यार्थियोँ को फँसाकर लाता था। शुभम खैरनाक का जब मोबाइल फ़ोन खँगाला गया तब उसके ह्वाट्सऐप्प-चैटिंग से खुलासा हुआ कि वह अभ्यर्थी-अभ्यर्थिनियोँ को ५०० से ६०० तक का अंक दिलाने का भरोसा दिलाता था। वह कई आरोपितोँ को वही प्रश्नपत्र ₹१५ लाख मे बेच चुका था। उसने अपनी गिरिफ़्तारी से बचने के लिए अपने बाल कटवाकर अपनी वेशभूषा बदल लिया था; परन्तु सर्विलांस डेटा के ज़रिये उसकी पहचान कर उसकी गिरिफ़्तारी कर ली गयी थी।

यश यादव

यश यादव हरियाणा का रहनेवाला है। उसने अहिल्याबाई (महाराष्ट्र) के निवासी धनंजय से लीक हुआ प्रश्नपत्र ख़रीदा था, फिर उसने ₹१५ से २० लाख मे सीकर के बिवाल-परिवार (माँगीलाल बिवाल-दिनेश बिवाल-विकास बिविल) तक प्रश्नपत्र पहुँचाया था। जब उसका ह्वाट्सऐप्प-समूह और टेलीग्राम खँगाला गया तब पता चला कि उसका नेटवर्क हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र तक फैला हुआ है।  यश यादव को गुरुग्राम से गिरिफ़्तार किया गया है। जयपुर के एस० एम० एस० कॉलेज की बिवाल-परिवार ही की पलक बिवाल पर जब गिरिफ़्तारी की सी० बी० आइ० तलवार लटकी दिखी थी तब उसे परिवारवालोँ ने छिपा दिया है, जो भाजपाई सत्ता-संरक्षण का खुलासा करता दिख रहा है।

राकेश मण्डावरिया : राकेश जवाहर नवोदय विद्यालय, पाटन का विद्यार्थी था, जो सीकर के पिपराली रोड पर ‘आर० के० कंसल्टेंसी एजुकेशन’ का संचालन करता है। वह कैरियर-कौन्सिलिंग के नाम पर विद्यार्थियोँ को ‘शॉर्ट-कट’ का लालच देकर अपने जाल मे फँसाता था। वह स्वयं कई वर्ष तक सीकर मे मेडिकल-प्रवेश-परीक्षा की तैयारी करता रहा; लेकिन विफल बना रहा। वह भी मुख्य आरोपितोँ मे से एक है। उसे ‘पेपर साल्वर गैंग’ का एक हिस्सा माना जाता है। उसे देहरादून से गिरिफ़्तार किया गया है।

अभी और भी ‘पापी’ हैँ, जिनका खुलासा ‘कल’ के अंक मे किया जायेगा। (क्रमश:)