● शब्द-विचार– ज़िम्म:दार-ज़िम्म:वार/ज़िम्मादार-ज़िम्मावार ●
शुद्ध शब्द ‘ज़िम्म:दार’ और ‘ज़िम्म:वार’ हैं। अब प्रयोग के धरातल पर यही दोनो शब्द क्रमश: ‘ज़िम्मेदार’ और ‘ज़िम्मेवार’ बन गये हैं, जो कि अशुद्ध और अनुपयुक्त हैं। हम इसका ‘ज़िम्मादार’ और ‘ज़िम्मावार’ के रूप मे प्रयोग कर सकते हैं। चूँकि इस प्रकार की वर्तनी (अक्षरी) वाले सहस्रादिक शब्द हैं, जिनमे से ‘अह’ (:) के चिह्न (‘चिन्ह’ अशुद्ध है।) के स्थान पर ‘आ’ की मात्रा का व्यवहार किया जाता है; जैसे– दफ़्अ:– दफ़्आ– धारा (‘दफ़ा’ अशुद्ध है।); गर्द:– गर्दा; पर्द:– पर्दा आदिक। ‘
‘ज़िम्म:दार’/’ज़िम्मादार’ और ‘ज़िम्म:वार’/ ‘ज़िम्मावार’ अरबी-भाषा के शब्द हैं और दोनो का अर्थ एक ही है।
ज्ञातव्य (जाननेयोग्य/जानने-योग्य/जानने के योग्य) है कि मूल शब्द ‘ज़िम्म:’/’ज़िम्मा’ (अरबी-भाषा का पुंल्लिंग (पुंलिंग, पुल्लिंग अशुद्ध हैं।) मे क्रमशः ‘दार’ और ‘वार’ प्रत्यय लगा हुआ है, जो ‘युक्त’ के अर्थ मे प्रयुक्त किये जाते हैं। वाक्यप्रयोग के आधार पर ‘ज़िम्म:’/’ज़िम्मा’ का समानार्थी शब्द ‘उत्तरदायित्व’ और ‘जवाबदेही’ है; भिन्नार्थक शब्द, ‘प्रतिभूति’ और ‘ज़मानत’ है, जबकि ज़िम्म:दार का मतलब ‘उत्तरदायी’, ‘जवाबदेह’, ‘प्रतिभू’ तथा ‘ज़ामिन’ (ज़मानत करनेवाला) है।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ जून, २०२२ ईसवी।)