नगर-पञ्चायत कार्यालय कछौना में जारी ड्रामा ख़त्म

नगर पंचायत में ईओ, लिपिक, अध्यक्ष व सभासदों के मध्य वर्षों से चल रहे विवाद को एमएलसी ने मध्यस्थता कर किया खत्म

एमएलसी ने शीघ्र अधिशासी अधिकारी का स्थानांतरण कराने का दिया आश्वासन

कछौना, हरदोई। नगर पंचायत कछौना पतसेनी में अधिशासी अधिकारी व लिपिक व अध्यक्ष व सभासद गणों के मध्य विवाद को सदस्य विधान परिषद अशोक अग्रवाल ने मध्यस्थता करते हुए खत्म किया। सदस्य विधान परिषद के आश्वासन पर अधिशासी अधिकारी का स्थानांतरण पर सभासद सहमत हुए।

बताते चलें नगर पंचायत कछौना पतसेनी में अधिशासी अधिकारी व अध्यक्ष व सभासद गणों का विवाद लगभग एक वर्ष से चल रहा है। विवाद की शुरुआत कांजी हाउस भूमि विवाद से शुरू हुई। नगर पंचायत की पूर्व तकनीकी गलतियों व न्यायालय में आदम पैरवी न होने के कारण मुकदमा खारिज हो गया था। जिस पर कछौना के कुछ लोगों ने आबादी की भूमि दर्शाकर गलत तरीके से कब्जा कर निर्माण कार्य करा लिया। जिसके बाद कोतवाली में गलत तरीके से सुलह समझौता हो गया। कांजी हाउस पर समझौता के तहत कांजी हाउस पर कुछ नगर के सभासद गण लोगों द्वारा दुकानों का निर्माण शुरू कर दिया। जिस मामले की भाजपा के युवा नेता पंकज शुक्ला ने शासन प्रशासन से शिकायत की। जिसके बाद निर्माण कार्य रुक गया। कछौना की सार्वजनिक भूमि जंगल झाड़ी, खेलकूद मैदान, स्कूल की भूमि, तालाबों, चारागाह आदि पर भूमाफियाओं की पैनी नजर पड़ गई। इन लोगों द्वारा धीरे-धीरे कानूनी दांवपेच में जमीनों पर कब्जा का खेल शुरू हो गया। जिस पर नगर पंचायत द्वारा प्रभावी कदम उठाते हुये अंकुश लगाने का प्रयास किया लेकिन राजस्व टीम का पर्याप्त सहयोग न मिलने के कारण प्रभावी कार्यवाही नहीं हो सकी।

इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के गलत पात्रता सूची की नगर पंचायत द्वारा निष्पक्ष जांच की गई। यह बात काफी हद तक नगर पंचायत के कुछ सभासदगणों को नागवार गुजरी, एक वर्ष से ज्यादा समय बीत जाने के कारण नगर पंचायत के बोर्ड की बैठक नहीं की गई। जिससे संवाद गैप होता चला गया। 18 जून को बोर्ड की बैठक किसी तरह आयोजित की गई। परंतु वह भी विवाद की भेंट चढ़ गई। इसके बाद 27 जून को पुनः बैठक निश्चित की गई। जिसमें नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी द्वारा बताया उनकी दादी की मृत्यु हो गई है। जिसमें कुछ सभासद गण अधिशासी अधिकारी के पैतृक गांव इस दुख की घड़ी में शामिल होने पहुंच गए, परंतु वहां मृत्यु की सूचना गलत मिली। जिसमें पर नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी द्वारा परिवार की दादी खत्म हो गई थी, वह लखनऊ में थी। यह बात नगर में धीरे-धीरे फैलने लगी, बोर्ड की बैठक को स्थगित करने के लिए अधिशासी अधिकारी ने झूठ बोला, यह बात अधिशासी अधिकारी को नागवार गुजरी, वह अपने परिवार के लोग व अन्य लोगों को लेकर धमकाने के अंदाज में लग्जरी वाहनों में लैस होकर सोमवार की शाम पहले नगर प्रमुख प्रतिनिधि विकास विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी के घर पहुंची। वह घर पर नहीं मिले। इसके बाद यह लोग सभासद पति इरफान के घर पहुंच गये। वहां पर वाद विवाद हो गया। यह सभी लोग नगर पंचायत कार्यालय पर आ गए। नगर में अधिशासी अधिकारी के इस कृत्य की खबर तेजी से फैल गई। अधिशासी अधिकारी कुछ बाहरी लोगों को लेकर सभासदों व प्रतिनिधियों को धमकाने व औकात दिखाने के लिए घूम रही थी। यह कृत्य विवाद का बड़ा कारण बना। धीरे-धीरे कार्यालय पर नगर के सैकड़ों लोग पहुंच गए। उन सभी लोगों को घेर लिया।

पूरे प्रकरण की सूचना कोतवाली कछौना, उप जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर जिला अधिकारी को दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी बाहरी लोगों को लग्जरी गाड़ियों सहित कोतवाली लाया गया। क्षेत्राधिकारी बघौली ने पूरे प्रकरण की गहनता से जांच की। जिसमें उन्होंने बताया मिस स्टैंडिंग से विवाद की स्थिति पैदा हुई। सदस्य विधान परिषद अशोक अग्रवाल ने मध्यस्थता करते हुए सभासद व अधिशासी अधिकारी के मध्य संवाद कर संवाद हीनेता को दूर करते हुए आपसी सौहार्द बनाए रखने और नगर के बेहतर विकास के लिए सुलह समझौता करा दिया। मध्यक्ष व सभासदों की शर्त को मांगते हुए अधिशासी अधिकारी का स्थानांतरण किया जाए, इस पर उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन को अवगत कराते हुए शीघ्र अधिशासी अधिकारी का स्थानांतरण करा दिया जाएगा। पूरे मामले में जिलाधिकारी संडीला मौजूद रहे।

मिली जानकारी के अनुसार अधिशासी अधिकारी द्वारा सभासद व सभासदों के प्रतिनिधियों के घरों में जाने के दौरान बाहरी लोगों में एक इंस्पेक्टर आरपी सिंह यादव पुलिस प्रशासन का रॉब दिखाने के लिए शामिल था। नगर पंचायत अध्यक्ष व सभासदों की आपसी खींचतान को लेकर नगर के कई विकास कार्य अधर में लटके हैं। नगर की प्रमुख सड़कों सहित सभी सड़कों की हालत जर्जर, गौआश्रय स्थल हेतु वृहद गौशाला का निर्माण अधर में लटका, कूड़ा निस्तारण के लिए एमआरएफ सेंटर अधर में लटका, नलकूप खराब होने के कारण व वाटर लेवल कम होने के कारण नगर वासियों के सामने पेयजल का संकट, सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा, पात्र व्यक्तियों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिल पाना।

नगर की प्रमुख समस्या जल निकासी की ठोस कार्ययोजना न बनना, नगर का परिसीमन आदि विकास कार्य प्रभावित है। जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। प्रशासन व जनप्रतिनिधियों व अध्यक्ष व सभासद गणों के बीच पुलिस प्रशासन की सूझबूझ से एक बड़ी घटना होते होते बची। सदस्य विधान परिषद अशोक अग्रवाल के प्रयास की सभी सराहना करें।

रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता