देश मे शराब पर पूर्णत: प्रतिबन्ध क्यों नहीं?

● आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय

देश की सरकारें लोभी रही हैं और नैतिकताविहीन भी; वह चाहें राज्य की रही हों वा केन्द्र की रही हों। यही कारण है कि आज़ादी के बाद से देश मे हर तरह की शराब खुले आम और चोरी-छिपे ख़रीदी-बेची जाती रही है और एक बहुत बड़ी धनराशि सरकार के ख़ज़ाने मे पहुँचायी जाती रही है। अफ़्सोस! (‘अफ़सोस’ अशुद्ध है।) आज न तो किसी राज्य की सरकार मे नैतिक बल है और न ही कथित सनातनी सरकार मे कि वे ‘शराब’ को पूर्णत: प्रतिबन्धित कर दें। वास्तव मे, कुछ राज्य-सरकारों ने अपनी व्यवस्थागत ईमानदारी का परिचय प्रस्तुत किया होता तो आज शराब उनके राज्यों मे दिखती नहीं; लोग पीकर मरते नहीं; परन्तु नेताओं,आबकारी-विभाग और पुलिस-तन्त्र की मिलीभगत, शिथिलता, कर्त्तव्यविहीनता तथा नपुंसकता के चलते, शराबख़ोरी व्यवस्था के सीने पर मूँग दलती नज़र आ रही है।

सुना जाता है और सुनाया जाता रहा है कि गुजरात मे उसकी स्थापना के बाद से ही शराबबन्दी लागू है; इसके बाद भी वहाँ शराब पीकर आयेदिन लोग मरते आ रहे हैं। पिछले दिनो गुजरात-विधानसभा के चुनाव के समय वहाँ के ४२ लोग शराब पीकर मरे थे और १०० से अधिक लोग हस्पताल मे भरती (‘भर्ती’ अशुद्ध है।) थे। यह तो शराबबन्दी के नाम पर घोर मज़ाक़ है। यही स्थिति बिहार, मिज़ोरम, नगालैण्ड तथा संघ-शासित क्षेत्र लक्षद्वीप की भी है, जहाँ काग़ज़ पर शराब प्रतिबन्धित है; परन्तु लोग पी रहे हैं और मर भी रहे हैं।

एक आँकड़े के अनुसार, सर्वाधिक शराबी उत्तरप्रदेश मे हैं, तत्पश्चात् बंगाल-राज्य मे। शराब की सबसे अधिक खपत छत्तीसगढ़ मे होती है, जहाँ जनजातीय जीवन जीनेवाले बहुसंख्यक लोग शराब-सेवन करते आ रहे हैं और जीवन से हाथ भी धोते जा रहे हैं।

पिछले दिनो बिहार मे शराब पीकर वहाँ के लगभग १०० लोग काल के गाल मे समा चुके हैं और ‘भारतीय जनता पार्टी’ के सारे ठीकेदार बिहार मे शराब के विरोध मे आवाज़ बलन्द करते हुए, नीतीश के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए हैं। अब प्रश्न है, जब यही ठीकेदार बिहार मे नीतीश के साथ ‘डबल इंजन’ की सरकार चला रहे थे तब विषैली शराब पीकर रोज़ ही शराबी मरते थे। उन दिनो ये ठीकेदार किस खोल मे घुसे हुए थे? किसी भी विषय का विरोध करने के लिए ‘विरोध’ करना बेहद निन्दनीय है और कापुरुष/कायर मानसिकता का परिचायक/परिसूचक/परिबोधक है। बेशक, राजनीति करो; मगर दोगली क़िस्म की नहीं; जनहित मे होनी चाहिए।

इन दिनो कथित ठीकेदारों की सरकार देश मे है। ऐसे मे, देश मे हर तरह के शराब-कारख़ाने को अवैध घोषित करते हुए, उनके क्रय-विक्रय को पूर्णत: प्रतिबन्धित क्यों नहीं करा दिया जाता?

(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; १६ दिसम्बर, २०२२ ईसवी।)