कछौना (हरदोई) : किसानों की आय दोगुनी करने का ढ़िढोरा पीटने वाली सरकार किसानों के लिए जमीनी स्तर पर सार्थक कदम नहीं उठा पा रही है। जिससे किसानों को अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है। न्यूनतम समर्थन मूल्य एक तरह से किसानों के लिए एक कवच का काम करता है, परंतु केंद्र प्रभारी व राइस मिलर्स के गठजोड़ के चलते आम किसान का धान नहीं खरीदा जा रहा है। किसान औने पौने दामों में बाजार में बेचने को विवश हैं।
वर्तमान सरकार में किसानों का अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान बिक्री में बड़े पैमाने पर हो रही अनियमितताओं की शिकायत जय हिंद जय भारत मंच ने शासन से की, संडीला तहसील स्थित मंडी में तीन क्रय केंद्र स्थापित हैं। जिसमें पीसीएफ का केंद्र प्रभारी बीमारी के चलते इस क्रय केंद्र पर 2 सप्ताह से खरीद बंद चल रही है। दोनों केंद्रों पर धान का स्टाक बड़े पैमाने पर होने की बात कहकर किसानों को टरका दिया जाता है। हजारों कुंतल धान मंडी में केंद्रों पर पड़ा है। राइस मिलर्स धान नहीं उठा रहे हैं। अधिकारियों से कई बार शिकायत के बावजूद राइस मिलर्स धन नहीं उठा रहे हैं। बड़े पैमाने पर समय बरसात की संभावना से धान भीगने की प्रबल आशंका है। जिसके चलते किसानों को टोकन सुविधा नहीं उपलब्ध कराई जा रही है। किसान अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की चौखट पर दौड़ लगाने को विवश हैं। क्रय केंद्रों पर बारदाना भी नहीं है। बारदाना का बहाना बनाकर किसानों को टरका दिया जाता है। काफी दबाव में क्रय केंद्र प्रभारी तौलने को राजी होने पर उन्हें स्वयं बारदाना की व्यवस्था करनी होती है। अधिकांश किसानों का सैम्पलिंग के नाम पर चावल टूटने का बहाना बनाकर टरका दिया जाता है। कई वर्षों से नमी मापक यंत्र क्रय केंद्रों को उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जिससे कई केंद्रों पर नमी मापक यंत्र मौजूद नहीं है। किसानों को अपनी उपज को बेचने के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। क्रय केंद्रों पर टोकन वितरण रजिस्टर गायब रहते हैं। क्रय केंद्र प्रभारी मनचाहे तरीके से किसानों का धान खरीद रहे हैं। केंद्र प्रभारी व राइस मिलर्स अपने चहेतों का धान खरीद दिखाकर कागजों पर लक्ष्य पूर्ति कर रहे हैं। जिसमें मोटा कमीशन लिया जाता है। सरकारी सिस्टम से आहत होकर किसान अपनी उपज 12 सौ रुपए प्रति कुंतल मार्केट में बेचने को विवश है। किसानों के नाम पर राजनीति की रोटी सेकने वाले दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे हैं। लखनऊ हरदोई राजमार्ग पर स्थित पीसीएफ संडीला बफर गोदाम क्रय केंद्र पर केंद्र प्रभारी हमेशा नदारद रहते हैं। केवल बैनर लगाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।
क्षेत्रीय विकास जन आंदोलन के अध्यक्ष रामखेलावन कनौजिया ने बताया किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी कानूनी अधिकार के रूप में मिलनी चाहिए, तभी किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मिली जानकारी के अनुसार केंद्र प्रभारी व राइस मिलर्स ने करोड़ों रुपयों का कारोबार किया है। इस व्यवस्था में चहेते किसान राइस मिलर्स व केंद्र प्रभारियों को अपने अभिलेख उपलब्ध करा कर पात्र किसानों का नुकसान कर रहे हैं। क्रय केंद्रों पर किसानों को सुविधाओं के नाम पर दुतकार व गालियां मिलती हैं। जब कोई बड़े अधिकारी के निरीक्षण के दौरान पेयजल, दरी, समियाना, पार्किंग, तख्त, धान की सुरक्षा हेतु त्रिपाल व्यवस्था दिखाकर फीलगुड कराया जाता है। उसके बाद पुनः वहीं व्यवस्थाएं चालू हो जाते हैं। क्रय केंद्र प्रभारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया उपज के सापेक्ष खरीद का लक्ष्य काफी न्यूनतम होता है। जिससे अधिकांश किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य में उपज की बिक्री नहीं हो पाती है। 31 जनवरी तक धान खरीद का लक्ष्य है। क्रय केंद्रों पर किसानों का जमकर शोषण किया जा रहा है। जय हिंद जय भारत मंच ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग शासन से की है। मामले को लेकर जिला खाद्य विपरण अधिकारी हरदोई ने बताया किसानों को असुविधा होने पर क्रय केंद्र के बैनर पर अंकित शिकायत नंबर एवं कृषक कंट्रोल रूम नंबर पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं, जिससे दोषियों पर तत्काल कार्यवाई की जा सके।
रिपोर्ट – पी०डी० गुप्ता