कछौना (हरदोई) : हाईकोर्ट ने गौवंश संरक्षण व संवर्धन पर दखल देते हुए सख्त निर्देश दिया है कि गायों को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए। गोरक्षा का मौलिक अधिकार बनाया जाना चाहिए। गोरक्षा को किसी धर्म से जोड़ने की जरूरत नहीं है। गाय भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जीवन का अधिकार मारने के अधिकार से ऊपर है। परंतु वर्तमान समय में छुट्टा गोवंश व किसानों की काफी दुर्दशा है।
ग्राम सभाओं में जो पशु आश्रय स्थल खोले गए हैं, वह प्रभावी देखभाल के अभाव में कब्रगाह बने हैं। गौवंशों की उपयोगिता न होने के कारण सैकड़ों की संख्या में गौवंश ग्रामीण क्षेत्र व सड़कों के किनारे विचरण करते हैं। इन पशु आश्रय स्थलों में टैंको में पानी नहीं रहता है। आए दिन मोटर खराब होने से टैंक खाली रहते हैं। कई पशु आश्रय स्थलों में अभी तक विद्युतीकरण नहीं हो सका है। सोलर लाइटों की बैटरी खराब हो चुकी है अथवा तेज आंधी व बरसात में टूट चुकी है। चारे के नाम पर केवल सूखा भूसा खाने को विवश हैं। जिससे चंद दिनों में आवारा गोवंश बीमार पड़ जाते हैं। वही ग्राम प्रधानों ने बताया कि सूखा भूसा का भुगतान भी समय से नहीं होता है। भुगतान बहुत कम है, इसलिए व्यवस्था प्रभावित होती है। चोकर कभी नहीं मिल पाता है, मिलता भी तब है जब कोई अधिकारी गौआश्रय स्थल का निरीक्षण करता है। तब चोकर की बोरी रखकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती है।
पशु आश्रय स्थलों में गोबर नियमित रूप से न उठाए जाने के कारण परिसर में काफी गंदगी रहती है। बदबू से अनजाने में जानवर कई बीमारियों के संक्रमण के शिकार हो जाते हैं। डॉ० पशु चिकित्सा अधिकारी नियमित रूप से आश्रय स्थलों में नहीं पहुंचते हैं। जिससे चुटहिल व बीमार जानवर तड़प-तड़प कर मरने को विवश हैं। यह पशु आश्रय स्थल कब्रगाह बने हैं। मृत गोवंशों के शवों को पास के ही खेत या खाई में डाल दिया जाता है। जिससे आसपास गांव में बदबू से लोगों का जीना दुश्वार है। कभी कभार केयर टेकर घायल गोवंशों को खाई में जीवित अवस्था में फेंक देते हैं। ज्यादातर पशु आश्रय स्थलों में पेड़ पौधे न होने के कारण गोवंश धूप में बीमार हो जाते हैं। मृत जानवरों का कोई पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता है। गोवंशों को अभिलेखों में दर्ज नहीं किया जाता है। किसी भी पशु आश्रय स्थल में गोवंशों के चारे के लिए बोई गई घास नैपियर नहीं जमा है। जिससे उन्हें हरा चारा नहीं मिलता है। अव्यवस्थाओं के कारण आवारा गौवंश किसानों की फसल चर रहे हैं। फसल के बचाव के लिए किसान रात रात जाग रहे हैं। किसान अपनी फसल को बचाने के लिए खेतों में ब्लड वाले तार लगा रखे हैं। जिनकी चपेट में आने से गोवंश बुरी तरह से घायल हो जाते हैं व तड़प तड़प कर मर जाते हैं। कभी कभार इन ब्लेड वाले तारों से किसान व राहगीर भी चुटहिल होते हैं। किसान गौवंशों पर लाठी व भाला से वार कर घायल कर देते हैं। आवारा गौवंशों की चपेट में आने से कई किसानों की मृत्यु हो चुकी है। आवारा पशु सड़क पर शाम होते ही आ जाते हैं। कोतवाली कछौना, पेट्रोल पंप के पास काफी संख्या में डेरा डाल देते हैं। तेज गति वाहन की चपेट में आने से प्रतिदिन गोवंश मर रहे हैं। वहीं मोटरसाइकिल चालक टक्कर से घायल हो जा रहे हैं। वहीं रेलवे लाइन पर पहुंचने से ट्रेन से कटने से मर रहे हैं जिससे हादसा होने की प्रबल संभावना होती है। सरकार द्वारा प्रभावी कदम न उठाए जाने के कारण गौवंशों की दुर्दशा है। वहीं किसान व आम नागरिक भी प्रभावित हो रहे हैं। लोगों में सरकार के प्रति काफी गुस्सा है, जो कभी आंदोलन के रूप में फूट सकता है।
रिपोर्ट- पी०डी० गुप्ता