● डोनाल्ड ट्रम्प की ‘कूटनीतिक’ भारत-यात्रा
डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
आज (२४ फ़रवरी) विश्व के सर्वाधिक बलशाली कहे जानेवाले देश संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भारत आना और सीधे अहमदाबाद (गुजरात) पहुँचकर बतायी गयी संख्या एक लाख पच्चीस हज़ार दर्शकों को विश्व के सबसे बड़े स्टेडियम ‘मोटारा’, अहमदाबाद के स्टेडियम से “नमस्टे-नमस्टे” शब्दावली से सम्बोधित कर, उन्हें भावना-स्तर पर अपने और संयुक्त राज्य अमेरिका के पक्ष में लाना, तत्पश्चात् जम्मू-कश्मीर और भारत की आन्तरिक राजनीति इत्यादिक वैवादिक विषयों से स्वयं को पृथक् कर भाषण करना, इस बात के द्योतक हैं कि ट्रम्प जिस मक़्सद से भारत आये हैं, वह निकट भविष्य में होनेवाले वहाँ के चुनाव को देखते हुए, मात्र एक ‘चुनावी यात्रा’ है और अपनी उस यात्रा को ‘और’ प्रभावशाली बनने के लिए, राष्ट्रपति बनने के बाद वे पहली बार अपनी पत्नी और बेटी के साथ भारत में आये हैं, कार्यावधि-समाप्ति होने के बाद एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने की चाह में।
ट्रम्प गुजरात के अहमदाबाद में प्रवेश करने के बाद सीधे ‘साबरमती आश्रम’ पहुँचे थे, तब चार व्यक्ति ही थे :– डोनाल्ड ट्रम्प, उनकी पत्नी, सुपुत्री तथा नरेन्द्र मोदी। वहाँ दो दृश्य उपस्थित थे :– पहला, डोनाल्ड ट्रम्प, उनकी पत्नी मेलानिया ट्रम्प, उनकी सुपुत्री तथा नरेन्द्र मोदी। नरेन्द्र मोदी शालीनतापूर्वक खड़े होकर “अतिथि देवो भव” को चरितार्थ कर भारत की सनातन संस्कृति को धन्य कर रहे थे। उसी मध्य, तीनों अपनी चरणपादुका उतार रहे थे। अब दूसरा चित्र समझें– चरणपादुका उतारने के बाद नरेन्द्र मोदी-सहित तीनों सीधे ‘सावरमती आश्रम’ में प्रवेश कर गये। ट्रम्प और मोदी ने सत्य-अहिंसा-प्रेमदूत बापू की तपस्थली में उनके चित्र पर ‘सूती’ धागे को चढ़ाया, फिर आगे बढ़कर वहाँ रखे चरखे को कातने के लिए ट्रम्प नीचे बैठ गये और वहाँ की एक सहयोगिनी ने वहाँ उन्हें चरखा कातने की कला समझायी थी। खेद का विषय है और आपत्तिजनक भी कि मोदी-सहित तीनों ने चरणपादुका उतारने के बाद हस्त-प्रच्छालन नहीं (हाथ नहीं धोये थे।) किये थे। कितना अच्छा रहता, यदि चारों हाथ-पाँव धोने के पश्चात् बापू के आश्रम में प्रवेश करते। भोजपुरी फ़िल्मों का नचनिया-गवनिया मनोज तिवारी इस पर कुछ कहेगा, जिसने दिल्ली-चुनाव के समय अरविन्द केजरीवाल का अप्रासंगिक वीडियो लाकर प्रचारित-प्रसारित किया था– केजरीवाल ने जूते उतारने के बाद बिना हाथ धोये हनुमान् जी की मूर्ति पर माला चढ़ाया था।
साबरमती आश्रम-अवलोकनोपरान्त ट्रम्प आयोजन-स्थल मोटारा स्टेडियम पहुँचे थे। वहाँ पहले से ही बड़ी संख्या में लोग ट्रम्प की एक झलक पाने के लिए प्रात: से ही प्रतीक्षा कर रहे थे। वहाँ नरेन्द्र मोदी की चपलता और त्वरा देखते ही बनती थी। उन्होंने सीधे संचालन का दायित्व ले लिया था, जो कि विश्व के एक प्रभावकारी देश के प्रधानमन्त्री के लिए उपयुक्त नहीं था। सभी औपचारिकताओं से सुदूरी बनाकर ट्रम्प को सम्बोधित करने के लिए मोदी ने ही निमन्त्रित किया था। हो सकता है, वैसा सुरक्षा-कारणों और समय को देखते हुए किया गया हो। नरेन्द्र मोदी का लगभग हिन्दी-भाषा में भाषण करना प्रभावकारी था। ‘नमस्ते ट्रम्प!’ समारोह में जनसमुदाय को सम्बोधित करते हुए ट्रम्प ने इतनी बुद्धिमत्ता के साथ अपना भाषण किया था कि सम्पूर्ण परिवेश ‘भारत-संयुक्त राज्य अमेरिकामय’ हो गया था। जिस किसी भी व्यक्ति ने उनके लिए चतुराईपूर्ण भाषण लिखा था, वह भारत की रग-रग से परिचित है। तभी तो तीज-त्योहार से लेकर खेल, ऐतिहासिक धरोहर, ज्ञानसम्पदा, कला-संस्कृति, दर्शन आदिक पक्षों पर ट्रम्प ने सारगर्भित प्रकाश डाला था। उन्होंने सुस्पष्ट शब्दों में कहा था– भारत सदैव से ज्ञान का भण्डार रहा है। ट्रम्प ने अपने उद्बोधन में यह कहते हुए कि सिर्फ़ ७० वर्षों में भारत सुपर पॉवर बना है और एक विशाल लोकतन्त्र के रूप में भारत ने बहुत प्रगति की है, नरेन्द्र मोदी के उस दावे की पोल खोल दी है, जिसमें मोदी यह कहने से नहीं चूका करते हैं कि ७० सालों में देश को मिला ही क्या, जो भी हुआ है, हमारे काल में हुआ है। ट्रम्प ने जिस तरह से दोनों देशों को मिलकर सामरिक, अन्तरिक्ष-आर्थिक क्षेत्रों में काम करने हैं का आह्वान कर दिया है, वह भारत के लिए एक प्रकार का शुभ संकेत है। उन्होंने जब भारत की धर्मनिरपेक्षता/पन्थनिरपेक्षता की सुदृढ़ता के प्रति अपनी आशा व्यक्त की है, तब प्रकारान्तर से ‘शाहीनबाग़-प्रकरण’ के उन आन्दोलनकारियों को बल मिलता है, जिसे अब नरेन्द्र मोदी को समझना ही पड़ेगा। ‘भारत-पाकिस्तान के जम्मू-कश्मीर-प्रकरण पर मध्यस्थता करने का राग अलापनेवाले ट्रम्प सोची-समझी रणनीति के अन्तर्गत ‘जम्मू-कश्मीर’ शब्द को ज़बान पर लाया ही नहीं। हाँ, इस्लामिक आतंकवाद को ध्वस्त करने के लिए एक साथ काम करने और पाकिस्तान को अपने यहाँ से आतंकवाद को समाप्त करने का विश्वास दिलाया है।
इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि साफ़ तौर यह ट्रम्प की यह चुनावी यात्रा है। उन्होंने स्वीकार किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका में ४० लाख आप्रवासी भारतीय हैं; वहाँ चार संयुक्त राज्य अमेरिकी नागरिकों में से एक भारतीय रहता है। इनके अतिरिक्त मोटारा स्टेडियम का समूचा समारोह संयुक्त राज्य अमेरिका के मीडिया-तन्त्र के माध्यम से वहाँ प्रसारित किया जा रहा था, जो वहाँ के आप्रवासी भारतीयों को भावनास्तर पर सम्मोहित करने के लिए पर्याप्त है। (सर्वाधिकार सुरक्षित– डॉ० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; २४ फ़रवरी, २०२० ईसवी)