संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ‘दोहरा चरित्र’

संयुक्त राज्य अमेरिका मे सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस जॉन राबट् र्स ने २० जनवरी को डोनाल्ड ट्रम्प को ‘कैपिटल रोटुण्डा हॉल’ मे छ: सौ गण्यमान्यजन की उपस्थिति मे रात्रि १०.४० बजे संयुक्त राज्य अमेरिका के सैँतालीसवेँ राष्ट्रपति के रूप मे शपथ दिलायी थी। सबसे पहले वहाँ के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शपथ ग्रहण की थी।

संयुक्त राज्य अमेरिका के दूसरी बार राष्ट्रपति के रूप मे पद एवं गोपनीयता की शपथ ग्रहण करने के पश्चात् डोनाल्ड ट्रम्प ने निवर्तमान राष्ट्रपति जो वाइडेन को उनकी उपस्थिति मे ही उन्हेँ घूरते हुए, जमकर खरी-खोटी सुनायी थी। उन्होँने जो बाइडेन की भरपूर भर्त्सना की थी, जोकि उनकी शालीनता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। उन्होँने कहा– बाइडेन ने अपराधियोँ को शरण दी है; सामाजिक ताना-बाना नष्ट कर दिया है। उन्होँने अमेरिका को पतन की राह पर लाया है। सीमाओँ की सुरक्षा नहीँ कर सके। इनके अतिरिक्त ट्रम्प बाइडेन पर जितने आरोप लगा सकते थे, लगाये। कृतघ्न डोनाल्ड भूल गये हैँ कि जो बाइडेन ने उन्हेँ उनके अक्षम्य अपराध से मुक्त कर दिया था।

वहाँ का सारा परिदृश्य उसी तरह से दिख रहा था। जिस तरह से नरेन्द्र मोदी प्रधानमन्त्री-पद की शपथ ग्रहण करते समय कहा था, ”मै विरोधियोँ पर बदले की काररवाई नहीँ करूँगा; परन्तु आगे चलकर, मोदी जिस तरह से अब तक लगातार चुन-चुनकर अपने विरोधी नेताओँ पर ग़लत आरोप लगवाकर परेशान करते आ रहे हैँ, कुछ उसी तरह से ट्रम्प के शासनकाल मे भी दिखे तो किसी को आश्चर्य नहीँ होना चाहिए। मोदी तो शपथ लेने के बाद से अबतक भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस पर हर स्तर से प्रहार करते दिख रहे हैँ।

ट्रम्प भी मोदी की ही तरह इधर-उधर की बातेँ करके अपने विरोधी देशोँ पर प्रभाव डाल रहे थे; परन्तु उनके पास ऐसा कौन-सा ‘रोडमैप’ है, जिसके आधार पर वे अपनी घोषणाओँ को पूर्ण करेँगे? यह नहीँ बताया। कहीँ ऐसा तो नहीँ कि वे भी अपने देशवासियोँ की नज़र मे ज़ुम्लेबाज़ सिद्ध हो जायेँ।

उन्होँने अपने सम्बोधन मे कहा कि वे पनामा कैनल (नहर) से चीन का दबदबा समाप्त करेँगे। वे उसे लेकर रहेँगे। इसे लेकर चीन के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के माध्यम से तत्काल प्रतिक्रिया सामने आ गयी– अगर ट्रम्प सहयोग करेँगे तो लाभ होगा; संघर्ष से दोनो पक्षोँ को हानि होगी। उस शपथग्रहण-समारोह और ट्रम्प के सम्भाषण के समय चीन के उपराष्ट्रपति उपस्थित थे। हमे भूलना नहीँ चाहिए कि अपने पहले राष्ट्रपति-कालावधि मे ट्रम्प चीन का कुछ बिगाड़ नहीँ पाये। चीन किसी स्तर पर संयुक्त राज्य अमेरिका से उन्नीस नहीँ है। इसके लिए चीनी राष्ट्रपति शी जी पिंग डोनाल्ड ट्रम्प को नाको चने चबवा देगा। इससे यह भी सुस्पष्ट हो चुका है कि ट्रम्प और पिंग मे ठननेवाली है।
डोनाल्ड ट्रम्प ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भाषा बोलते हुए दिखे थे, जिसमे उन्होँने कहा कि वे ‘थर्ड जेण्डर’ समाप्त कर, केवल दो जेण्डर :– महिला-पुरुष रखेँगे। ट्रम्प को इससे अपने ही देश के ‘थर्ड जेण्डर’ वालोँ के विरोध का सामना करना पड़ेगा।

इसके साथ ही उन्होँने दक्षिणी अमेरिका मे ‘राष्ट्रीय आपात्काल’ की घोषणा कर दी है और अपनी सेना भेजने की भी। हमे नहीँ भूलना चाहिए कि ट्रम्प ने कहा था– मै युद्ध नहीँ छेड़ूँगा; परन्तु अपनी शपथ लेने के पाँच मिनट के बाद ही उनकी नीति बदल गयी। वे पनामा नहर लेने, वहाँ दक्षिणअमेरिका मे सेना भेजने की बात कहकर, अपने दोगले चरित्र का परिचय दे दिया है; यानी कथनी और करनी मे फ़र्क़ दिखना।

उन्होँने कहा― संयुक्त राज्य अमेरिका महान् और अनोखा बननेवाला है। सारी व्यवस्था आजसे बदलनेवाली है। अमेरिका मे अवैध घुसपैठ नहीँ होगी। जो जहाँ से आये हैँ वहाँ जायेँगे। अब कोई अमेरिका का इस्तेमाल नहीँ कर पायेगा। मैक्सिको-सीमा पर दीवार बनायेँगे और मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलेँगे। क़ीमतोँ पर नियन्त्रण पाना, मेरी प्राथमिकता होगी। अमेरिका पुन: निर्माण का केन्द्र बनेगा, जो चीन को पीछे छोड़ देगा। दूसरे देशोँ पर ‘टैक्स’ और ‘टैरिफ’ बढ़ायेँगे। मेरी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ रहेगी। रंगभेद से दूर रहकर ‘प्रतिभा’ को प्राथमिकता देँगे; क्योँकि मेरे चुनाव मे उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। अश्वेत-समुदाय ने मेरा बहुत सहयोग किया है और उनका मुझपर बहुत भरोसा है। अमेरिका मे किसी तरह की ‘सेंसरशिप’ नहीँ होगी। अमेरिकी सेना उस युद्ध मे शामिल नहीँ होगी, जो उसका युद्ध नहीँ होगा। अमेरिका के दुश्मनो को हराकर रहेँगे। आज का दिन अमेरिका की आज़ादी का है। न संविधान को भूलेँगे और न ईश्वर को।

ट्रम्प के इस कथन से साफ़ झलकता है कि वे ‘शान्ति का नोबेल पुरस्कार’ चाहते हैँ, तभी उन्होँने कहा था– मै युद्ध को रोकूँगा। मै चाहता हूँ, मुझे ‘शान्तिदूत’ के रूप मे याद किया जाये। हम विश्व मे शान्ति चाहते हैँ। जिस तेवर मे ट्रम्प भाषण कर रहे थे और जिन शब्दोँ का प्रयोग कर रहे थे, उनसे तो यही ध्वनि निकल रही थी कि उनका अहंकार पहले-जैसा ही है। डोनाल्ड ट्रम्प अपने भाषण के माध्यम से कुछ देशोँ को धमकाने का काम तो कर लिया है; परन्तु क्या वे उन देशोँ की शक्ति से अवगत हैँ? डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे राष्ट्रपतित्वकाल को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका का स्वर्णकाल’ कहा है, इसका आधार क्या है; बाइडेन का कार्यकाल ‘मिट्टीकाल’/’राखकाल’ था? यहाँ ठीक उसी तरह से है, जिस तरह से भारत की ‘मोदी ऐण्ड कम्पनी’ ने वर्ष २०१४ को ‘भारत की वास्तविक आज़ादी’ की संज्ञा दी है।

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