कटिहार:- हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर”गूंज कलम की” साहित्य परिवार द्वारा साहित्य के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। इस दिन ” नटखट कान्हा” नामक साहित्यिक ई-पत्रिका का समारोह पूर्वक भव्य उद्घाटन हुआ। इस पत्रिका का ऑनलाइन उद्घाटन साहित्यकार श्री राजीव प्रखर जी में किया।
अपने उद्बोधन में प्रखर जी में साहित्य के क्षेत्र में गूंज कलम की साहित्य संस्थान की भूरी भूरी प्रशंसा की और इस ई- पत्रिका में छपी कविताओं की शैली, सरसता और सहजता को अद्वितीय बताया। “गूंज कलम की ” साहित्य संस्थान की राष्ट्रीय अध्यक्षा डॉ.स्नेहलता द्विवेदी “आर्या” ने समारोह की अध्यक्षता की और कैलाश चन्द्र साहू ने मंच संचालन किया। डॉ. आर्या ने अपने संबोधन में संपादक मंडल और रचनाकारों को साधुवाद दिया और उनके लग्न और लेखनी को सराहा। धन्यवाद ज्ञापन सुश्री रुचिका राय ने किया।
नटखट कान्हा एक काव्य संग्रह है जिसमें विभिन्न कवियों की कृतियां संकलित हैं। भक्ति – काव्य की श्रृंखला में यह एक सशक्त और प्रभावी पहल है। इसका संपादक डॉ. स्नेहलता द्विवेदी”आर्या” के नेतृत्व में डॉ.अर्चना वर्माजी और सुश्री रुचिका राय जी ने किया है। इस काव्य संग्रह में लगभग अस्सी रचनाकारों की रचनाएं हैं जो कृष्ण के विविध रूपों यथा बाल,- लीला, युवा स्वरुप, आध्यात्मिक चेतना, रासलीला, प्रेम, ज्ञान इत्यादि को बहुत सुंदर ढंग और सरस परिमार्जित तरीके से अभिव्यक्त करती हैं।

इस दिन संस्था द्वारा डॉ. ज्योति सिंह बेदी सुश्री ज्योति कुमारी और सुश्री सस्मिता मुर्मू को साहित्य के प्रति उनके समर्पण , उत्कृष्ट योगदान एवम् सतत सक्रियता के सम्मान में क्रमशः “भाव्या श्री” “नव्या श्री” और “सिबिल” उपनामों से अलंकृत किया गया। सिबिल एक संथाली शब्द है जिसका अभिप्राय मधुर (स्वीट) होता है।
गूँज कलम की ने हिन्दी दिवस पर रचनाकारों को उपनामों से किया सम्मानित
गूँज कलम की साहित्यिक मंच की संस्थापिका डॉ•स्नेहलता आर्या ने हिंदी दिवस के उपलक्षय मातृभाषा को जन-जन तक पहुंचाने हेतु संकल्पबद्ध व साहित्य सेवा में लीन रहने के फलस्वरूप साहित्य सृजन के क्षेत्र में विशिष्ट प्रतिभा के सम्मान स्वरूप डॉ•ज्योति सिंह वेदी को भाव्याश्री एवं ज्योति कुमारी को नव्याश्री और सस्मिता मुर्मु को सिबिल उपनाम से सम्मानित किया है।
डॉ•ज्योति सिंह वेदी जी मधेपूरा, बिहार में अध्यापिका हैं साहित्य सृजन के शेत्र बचपन से रही आपकी अनेक रचनाऐ पत्र-पत्रिका में प्रकाशित हो रही हैं आपने रचनाधर्मिता व मातृभाषा हिंदी को प्रचार-प्रसार करने में आपके अमूल्य योगदान को देखते हुए आपको “भाव्याश्री”सम्मान से अलंकृत किया जाता हैं आ• ज्योति कुमारी .जी आप सिविल कोर्ट रामगढ़ (झारखण्ड )में अधिवक्ता हैं, आपकी रचनाऐ कई साझा संकलन में प्रकाशित हो चूँकि हैं आपको साहित्य सृजन के शेत्र में विशिष्ट प्रतिभा के सम्मान स्वरूप गुंज कलम की साहित्य परिवार की विशेषज्ञ समिति द्वारा आपको उपनाम ” नव्याश्री ” से अलंकृत किया जाता है।आपका साहित्य में विशेष रूचि होने एवं साहित्य जगत में अमूल्य योगदान को देखते हुए मंगलवार से साहित्य जगत में सुश्री ज्योति भाव्याश्री एवं सुश्री ज्योति नव्याश्री के नाम से जानी जाएगी।और सस्मिता मुर्मु सिबिल के नाम से जानी जाएंगी।