मणि सत्यनारायण तिवारी :
मैं सम्मान सभी धर्मों का करता हूँ पर मैं हिन्दू हूँ, इसपर मुझे गर्व है । बुद्धिजीवी कितना भी धर्म निरपेक्षता की बातें कर लें, लेकिन भारत “राष्ट्र” तभी तक है जब तक यह हिन्दू बहुल है । हो भी क्यों न ? यह “राष्ट्र” शब्द आज नहीं बना, यह शब्द लाखों साल से है।
जब देवी दुर्गा प्रकट हुईं तो कहा गया था “त्वया दुर्गा, त्वया राष्ट्र” । माता दुर्गा को राष्ट्र इसलिए कहा गया कि वे सभी ईश्वर के अंश को लेकर महान शक्ति के रूप में अवतरित हुईं । वैसे ही कोई राष्ट्र अपने घटक क्षेत्रों को जोड़कर, अपने यहाँ रहने वाले विभिन्न प्रकार के लोगों का अंश लेकर ताकतवर और महान बनता है । यहाँ राष्ट्र का प्रयोग एक महिला के लिए हुआ है जो महिला सम्मान की बात का भी सूचक है । इसका अर्थ हुआ “राष्ट्र” शब्द का जन्म हिंदुत्व से हुआ और बिना हिंदुत्व के हम अपने राष्ट्र की कल्पना कर भी नहीं सकते हैं ।
भारत राष्ट्र की उत्पत्ति ही हिंदुत्व से हुई है । यही कारण है कि भारत में सहिष्णुता है । सहिष्णुता का अर्थ है सबको स्वीकार कर लेना । मतलब जो जैसा है , जिस रूप में है , जिस तरह का है , जिस विचार का है , जिस स्वाभाव का है, उसको उसी रूप में स्वीकार कर लेना । उसमे जो बुराई है उसको दूर करने का प्रयत्न करना । हमारे भारत का यही गुण भारत को महान और अन्य देशों से अलग बनाता है ।
श्री राम के समय, श्री राम ने विभीषण को , अंगद को स्वीकार किया । कृष्ण ने अत्याचारी राक्षस के यहाँ बन्दी महिलाओं के पत्नियों के रूप में स्वीकार किया । भारत ने शक , कुषाण, अरबियों , पुर्तगालियों सबको स्वीकार किया । इन सब स्वीकृतियों के मूल मे हिंदुत्व ही था । क्योंकि दुनिया का एक मात्र धर्म या संस्कृति हिन्दू ही है, जिसमे कोई भी काफिर नहीं ।
ये धर्म कहता है “सर्वे भवन्तु सुखिनः” । यह हिंदुत्व ही हमारे राष्ट्र की ताकत है । यहाँ की संस्कृति का आधार है और इस हिंदुत्व के मूल में हैं राम, कृष्ण , विवेकानंद । जिनका जीवन भारत और हिंदुत्व का आधार है । इन्ही के विचारों से भारत जैसे राष्ट्र का निर्माण होता है । राम भारत के महानता के प्रतीक हैं । अतः बिना राम के, बिना राम मंदिर के , बिना हिंदुत्व के भारत राष्ट्र की कल्पना ही नहीं की जा सकती है । तभी किसी ने पहली बार कहा होगा “हिन्दू घटा देश बंटा” ।
अतः मित्रों कितना भी सेकुलर हो जाएं लेकिन अपने हिन्दू होने के अभिमान को नहीं खोयें । आपका यही अभिमान भारत को एक राष्ट्र बनाता है और आपकी मातृभूमि को अखंड रखते हुए इसे महान और ताकतवर बनाता है ।