— आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय
६९ हज़ार की भरती परीक्षा में फिसड्डी पटेलों ने बाज़ी कैसे मार ली है? अब यह विषय भी सप्रमाण न्यायालय में उठना चाहिए। उनके हाइस्कूल, इण्टरमीडिएट तथा स्नातक के अंक-प्रतिशत को देखकर कहीं से नहीं लगता कि वे मेधावी विद्यार्थी हैं; परन्तु जब विशेष टेट-परीक्षा में प्राप्त १४०-१४१ अंक दिखते हैं तब माथा ठनकने लगता है। इतना ही नहीं, अन्य जातियों के अभ्यर्थियों की भी वही स्थिति है।
इसके लिए प्रयागराज ज़िला के बहरिया थानान्तर्गत कपसा गाँव का निवासी के०एल० पटेल बहुत हद तक उत्तरदायी माना जा रहा है, जिसने विगत एक दशक से शिक्षक भरती के नाम पर फ़र्ज़ीवाड़े करने-कराने की दुकान खोल रखी है। कहने के लिए तो वह झाँसी के एक प्राथमिक स्वास्थ्य-केन्द्र में एक सामान्य कर्मचारी है, जबकि शिक्षा और सेवा के क्षेत्रों में सम्बन्धित अधिकारियों के साथ साँठ-गाँठ कर वह परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्रों का क्रय-विक्रय कर लम्बा-लम्बा हाथ मारता आ रहा है।

मध्यप्रदेश के चर्चित घोटाला ‘व्यापमं’ में भी शातिर खिलाड़ी के०एल० पटेल का नाम लिया जा रहा है, जिसकी जाँच शुरू हो चुकी है। वह नौकरी दिलवाने का ठीका भी लेता था, जिसका सारा खेल करोड़ों में होता था। आपराधिक प्रवृत्ति के पटेल के पास अकूत चल-अचल सम्पत्ति भी है। वह अपने कपसा गाँव की युवक-युवतियों को ग्राम विकास अधिकारी से लेकर अन्यान्य विभागों में नौकरियाँ लगवा चुका है। ६९ हज़ार अध्यापकों की भरती परीक्षा में भी उसका नाम आ रहा है।
इस तरह से जो वास्तव में, सुयोग्य अभ्यर्थी हैं, उनका हक़ उक्त प्रकार के बेईमान लोग हड़प ले रहे हैं। वैसे अयोग्य और कुपात्र लोग जब अध्यापक बन जायेंगे तब वे विद्यार्थियों को क्या और कैसे पढ़ायेंगे?
उत्तरप्रदेश-सरकार को इस विषय में अपनी जागरूकता का परिचय देना होगा, अन्यथा परीक्षा माफ़िया देश की मौलिक प्रतिभाओं के साथ इसी तरह से अन्याय करते रहेंगे।
(सर्वाधिकार सुरक्षित– आचार्य पं० पृथ्वीनाथ पाण्डेय, प्रयागराज; ७ जून, २०२० ईसवी)