एमडीएम में वित्तीय अनियमितता बरतने के दोषी प्रधानाचार्य पर विभागीय अधिकारी मेहरबान

दीपक कुमार श्रीवास्तव-

  • निर्धारित समयावधि पूर्ण होने पर भी कार्यवाही नहीं ।
  • सामाजिक कार्यकर्ता ने सीएम व डीएम से मामले की शिकायत कर की जाँच व दोषियों पर कार्यवाही की मांग ।

कछौना (हरदोई)। नगर के सामाजिक कार्यकर्ता ने कस्बा स्थित जनता इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और जिला विद्यालय निरीक्षक पर मिलीभगत के गम्भीर आरोप लगाते हुये मुख्यमंत्री व जिलाधिकारी से शिकायत की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभागीय जाँच के बाद प्रधानाचार्य द्वारा एमडीएम में वित्तीय अनियमितता बरतने की पुष्टि होने के बाद भी जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा खाऊ-कमाऊ नीति के चलते प्रधानाचार्य से सांठगांठ कर संरक्षण प्रदान करते हुए उनके विरुद्ध कार्यवाही की अध्यावधि पूर्ण होने तक निलंबन की कार्यवाही नही की है, जबकि प्रबंध समिति द्वारा प्रधानाचार्य के विरुद्ध निलंबन प्रस्ताव का अनुमोदन दो माह पूर्व ही जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को भेजा जा चुका है।

दरअसल, नगर कछौना निवासी शिकायतकर्ता बालकृष्ण शुक्ला ने बीते दिनों स्थानीय जनता इंटर कॉलेज कछौना के प्रधानाचार्य नरेंद्र बहादुर यादव पर मध्यान्ह भोजन योजना (एमडीएम) में वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाते हुए डीएम व उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी। जिसका संज्ञान लेते हुए डीएम पुलकित खरे ने निष्पक्ष जांच के आदेश दिए थे। खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार बोस द्वारा एमडीएम प्रकरण में की गई जांच में जो तथ्य सामने आए उनसे प्रधानाचार्य द्वारा एमडीएम में वित्तीय अनियमितता बरतने की बात उजागर हुई। खंड शिक्षा अधिकारी ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित की। शिकायतकर्ता बालकृष्ण शुक्ला ने हाल ही में आईजीआरएस के माध्यम से सीएम व डीएम को लिखे शिकायती पत्र में यह बताया है कि तत्कालीन पटल लिपिक शमीम अंसारी के द्वारा दोषी प्रधानाचार्य नरेंद्र बहादुर यादव के विरुद्ध अंतिम चेतावनी पत्र 5 दिसंबर को जारी किया गया। जिसके बाद विद्यालय की प्रबंध समिति द्वारा 27 दिसंबर को प्रधानाचार्य के निलंबन प्रस्ताव का अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को पंजीकृत डाक द्वारा भेजा गया था। विभागीय नियमानुसार प्रबंध समिति द्वारा भेजा गया निलंबन प्रस्ताव अनुमोदन की तिथि से 60 दिनों तक ही वैध रहता है, उसके बाद वह स्वतः निरस्त हो जाता है। इसके बावजूद जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा निर्धारित समयावधि 26 फरवरी तक प्रधानाचार्य के विरुद्ध निलंबन की कार्यवाही नहीं की गई।

शिकायतकर्ता ने शिकायती पत्र में जिला विद्यालय निरीक्षक पर प्रधानाचार्य से सांठगांठ कर उन्हें संरक्षण प्रदान के जाने के गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा विद्यालय प्रबंध समिति से निलंबन प्रस्ताव प्राप्त होने के बावजूद दोषी प्रधानाचार्य के विरुद्ध निर्धारित समयावधि में निलंबन की कार्यवाही ना करने से यह बात स्पष्ट प्रमाणित होती है कि जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा खाऊ कमाऊ नीति व मिलीभगत के चलते 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो रहे प्रधानाचार्य नरेंद्र बहादुर यादव को सकुशल सेवानिवृत्त कराने के लिये निलंबन की कार्यवाही ना कर संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। वहीं शिकायतकर्ता ने जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रधानाचार्य से संरक्षण के एवज में मोटी रकम लेने की आशंका जताते हुये पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।