क्या यही है गुजरात का सुशासन ?

उत्तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन की वॉल से साभार-     


श्री आर एस यादव गुजरात के 1988 बैच के एक सीनियर आई पी एस अधिकारी हैं । इन्हें आज एडिशनल डी जी पी होना चाहिए था । कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक श्री यादव को प्रमोशन नहीं दिया गया है । इनकी ईमानदार, दिलेर और कर्मठ पुलिस अफसर की छवि है । इन्होनें अपने पुलिस अधीक्षक के कार्यकाल में भ्रष्ट राजनेताओं पर नकेल कसी है । इसलिए तड़ीपार इनसे इतना घबराता है कि गृह विभाग में कह रखा है कि इसको झूठी इन्क्वायरी से इतना तंग करो कि नौकरी छोड़ कर चला जाये । इस रंजिश की वजह ये है कि 1999 में श्री यादव ने तत्कालीन गवर्नर को पत्र लिखकर उस समय के गुजरात के गृह मंत्री हरेन पन्डया के खिलाफ पुलिस के कामकाज में दखल देने विशेष रूप से गम्भीर मामलों में पुलिस द्वारा की जा रही जाँच में बाधा डालने जैसे मामले में मुकदमा दायर करने की इजाजत मांगी थी ।
परन्तु गवर्नर महोदय ने उस पत्र पर कुछ भी कार्यवाही नहीं की । उल्टे गुजरात सरकार ने श्री आर एस यादव को ही झूठी इन्क्वायरी के ज़रिए तंग करना शुरू कर दिया था । उनको गलत तरीके से निलंबित किया और उनकी सैलरी भी बन्द कर दी गयी । मानसिक प्रताड़ना इतनी दी गयी कि श्री यादव गुजरात छोड़ कर अपने राज्य हरियाणा वापस चले जाएं और झूठे मुकदमों में फसने से बचे रहें । ये जालिम सरकार फिर भी बाज नहीं आई । यादव जी को बिना वजह गैरहाज़िर दिखा कर जनवरी 2000 में डिसमिस कर दिया । यादव जी इस अन्याय के खिलाफ कोर्ट गये और 2010 में जीत कर अपनी आई पी एस की नौकरी पर फिर से बहाल हो गए ।

गुजरात सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा । लेकिन फिर से झूठी इन्क्वायरी बिठा कर प्रमोशन रोकना शुरू कर दिया । कथित तौर पर इस सबके पीछे तड़ीपार अमित शाह का हाथ था । श्री शाह ने कह रखा था कि इसको एस. पी. रैंक से उपर नहीं जाने दो और इतना जलील करो कि नौकरी छोड़ कर खुद चला जाये । कोर्ट ने यादव जी को प्रमोशन देने का आदेश किया हुआ है । लेकिन इस फाइल (श्री आर एस यादव की) को छोड़ कर बाकी सबकी, यहां तक कि जाने माने भ्रष्ट अफसरों का प्रमोशन भी कर दिया गया है । यादव जी की फाइल अब भी धूल में दबी किसी कोने में पड़ी है । हद तो तब हो गई जब इस बार की तबादला लिस्ट में 1988 बैच के सीनियर श्री आर एस यादव को सबसे खराब जगह (कद और कार्य के अनुसार) एस. पी. रैंक पर सरदार सरोवर डैम पर कमांडेंट बना कर भेजा गया है । कितने शर्म की बात है कि एक साधारण किसान का बेटा मेहनत करके IPS (जनरल कैटेगरी) बनता है और किस तरह से ये भ्रष्ट, अपराधिक प्रवृति वाले सनकी राजनेता उनकी ज़िन्दगी बर्बाद करने में कामयाब हो जाते हैं । ये लोग अपनी तानाशाही के आगे कोर्ट को भी कुछ नहीं समझते हैं ।

क्या यही गुजरात का सुशासन है?