छन्देष्टि हिन्दी सृजन की कुंजी है :- पुरोहित
भवानीमंडी:- साहित्य संगम संस्थान की मासिक पत्रिका छंदेष्टि का विमोचन संस्थान के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजेश कुमार शर्मा “पुरोहित” के कर कमलों से सोमवार को किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि छन्देष्टि हिन्दी सृजन की कुंजी है। संस्थान की छंदशाला में नियमित अभ्यास कराया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के छन्दों पर अभ्यास कराया जाता है। प्रस्तुत मासिक पत्रिका के दिसम्बर 2018 के इस अंक में राधारमण छन्द, रमनीयक छन्द, इन्द्रवशा छन्द, अपराजिता छन्द, कुकुभ छन्द। छह छन्दों पर आधारित रचनाओं का संकलन किया गया गया है। इस पत्रिका में प्रकाशित सभी रचनाकारों को बधाई देता हूँ। संस्थान ने छंदशाला में छन्द सिखाने की अनूठी पहल की है। मैं छंदगुरुजी शेलेन्द्र खरे सोम जी को विशेष बधाई देता हूँ।
संस्थान के अध्यक्ष राजवीर सिंह मन्त्र ने बताया कि इस मासिक पत्रिका में चन्द्रपाल सिंह चन्द्र, राजवीर सिंह मन्त्र, शैलेन्द्र खरे, छगनलाल गर्ग विज्ञ, आशीष पांडेय जिद्दी, दाताराम नायक सुनील कुमार अवधिया, डॉ. अरुणकुमार श्रीवास्तव अर्णव, रवि रश्मि अनुभूति मुम्बई, इन्दु शर्मा शचि अदम, शकुन्तला अग्रवाल, डॉ. मीना भट्ट, दीपाली पांडेय दीया की रचनाएं प्रकाशित की गई है। मन्त्र ने कहा कि छन्दों का हवन है छन्देष्टि।
इस अवसर पर छन्दाचार्य शेलेन्द्र खरे सोम ने कहा कि साहित्य संगम संस्थान की छंदशाला में सनातनी छन्दों का क्रमिक अभ्यास कराया जाता है जो संस्थान की प्रमुख विशेषता है।
पत्रिका के संपादक चन्द्रपाल सिंह चन्द्र ने कहा कि सृजन में अनुशासन की अहम भूमिका होती है।अनुशासन छन्दों के बिना संभव नहीं है। प्रत्येक हिन्दी रचनाकार को छन्द में ही लिखना चाहिए।
संस्थापक संपादक आशीष पांडेय जिद्दी ने कहा कि छन्देष्टि छन्दों का पावन यज्ञ है। इस दौरान पत्रिका के प्रबंध संपादक सहित कई रचनाकार मौजूद रहे।