बुखार से हुई मौतों ने मचाई शासन तक खलबली, टीम लेकर सण्डीला पहुंचे जेडी

               हरदोई- सण्डीला में 10 दिनों में बुखार से जब 64 लोगों के मरने की खबर को जब मीडिया ने प्रमुखता दी तो शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश पर ज्वाइंट डायरेक्टर सुनील रावत अपनी मंडलीय टीम को लेकर शुक्रवार को सण्डीला पहुंचे।इससे पहले उन्होंने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर बुखार के मरीजों का हालचाल जाना।जेडी के पहुंचते ही हड़कंप मच गया और बुखार प्रभावित सण्डीला क्षेत्र के गांवों में जिला मुख्यालय से पहुंची टीम डॉ सीबी सिंह, डॉ राजपाल, असरिता, प्रिया, संजय चौहान, दमेश, सर्वेश के द्वारा ग्राम तीलोइया कला एवं नारायनपुर में जाकर मरीजों को टीम ने सिक्रोरिया में जिला मुख्यालय की टीम डॉ रजनीश, विजय, देवराज सिंह, विकास, विमल रमेश, सर्वेश के द्वारा मरीजों को गोस्वा डुंगवा में डॉ रजनीश कुमार, राजू, विपिन बिहारी, वही अहिमाखेड़ा में डॉ अंजू, भावना, सौरभ दीक्षित, शैलेंद्र कुमार भिटौली में डॉ सरिता रावत, अपलेश कुमारी, अखिलेश सिंह,दोस्त मोहम्मद तीलोइया खुर्द में डॉ राजपाल,धर्मेंद्र,के.के कनौजिया, मोहम्मद इरसद के द्वारा मरीजो को उपचारित किया गया एवं मरीजों की जांच की गयी।
            जिले में बुखार अपने पैर पसारता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह में बुखार से सण्डीला इलाके में ही 64 लोगों की मौत हो चुकी है।बुखार से मौतों को स्वास्थ्य महकमा झुठला रहा था लेकिन जब मीडिया ने प्रमुखता दी तो शासन तक खलबली मच गई। शासन के निर्देश पर ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ सुनील रावत शुक्रवार दोपहर सण्डीला जा पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले बुखार से पीड़ित मरीजों का हाल जाना और अस्पताल में बुखार के कितने मरीज भर्ती हैं और कितने भर्ती होने के बाद ठीक होकर घर चले गए। किसकी बुखार से इलाज के दौरान मौत हुई यह पूरा रिकार्ड जेडी ने खंगाला।जेडी ने विभागीय अधिकारियों को जमकर फटकारा भी जिससे मातहत पसीना पसीना नजर आए।
       यूं तो मानसून सीजन शुरू होते ही बुखार, वायरल फीवर और नजला – जुकाम के मरीजों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।जुलाई- अगस्त के मुकाबले में डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की ओपीडी में रोजाना औसतन 35- 40 फीसदी मरीजों की बढ़ोतरी हुई है। जो वायरल फीवर या किसी भी बुखार से पीडि़त हैं।निजी हॉस्पिटल्स व नर्सिग होम्स में भी बुखार से पीडि़त मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़ा है। बुखार के मामले बढ़ने से डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की पैथोलॉजी पर भी दबाव बढ़ गया है। ओपीडी में बुखार के मरीजों की वजह महज वायरल फीवर कहकर टाली हीं जा रही। बल्कि फीवर की वजह जानने को मलेरिया और डेंगू की जांच कराई जा रही। इससे पैथोलॉजी में होने वाली जांचों का रोजाना ग्राफ बढ़ा है।
         डर का आलम यह है कि हॉस्पिटल में पहुंचने वाले ज्यादातर मरीज भी खुद डॉक्टर से जांच करा लेने की बात कहते हैं। डॉक्टर्स बताते हैं कि कई बार खुद मरीज ही कहने लगते हैं कि जांच करवा लीजिए। क्योंकि, लगातार मलेरिया और डेंगू की खबरों के आने से वह सहमे हुए हैं।मानसून का यह सीजन मच्छरों के लिए बीमारियां फैलाने के लिए बेहद मुफीद साबित हो रहा। गर्मी और सर्दी में टेंप्रेचर बेहद गर्म या ठंडा होने से बैक्टीरिया व वायरस के पनपने की संभावना न के बराबर रहती है। लेकिन मानसून सीजन शुरू होते ही मौसम न गर्म रहता है, न ही ठंडा। यह टेंप्रेचर बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के लिए भी अपनी तादाद बढ़ाने के लिए सबसे अच्छा होता है। वहीं इस मौसम में इंसान की इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ जाती है। जिससे बीमारियों से लड़ने की ताकत कम होते ही बैक्टीरिया व वायरस तेजी से हमें अपनी चपेट में लेते हैं।